सुप्रीम कोर्ट का फर्जी बाबाओं पर रोक लगाने से इंकार; पूछा हम कैसे पता लगाएं

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें यह मांग की गई थी कि जो फर्जी बाबाओं या फर्जी आध्यात्मिक गुरु है, उनके आश्रम को बंद किया जाए। इस याचिका की सुनवाई पर फैसला करने के लिए बैठे प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे ने कहा कि कोर्ट कैसे तय करेगा कि ये बाबा फर्जी है या नहीं। इस मामले में याचिककर्ता ने अखिल भारतीय अखाड़ा की सूची पेश की, जिसमें उन्होंने फेक बाबाओं की सूची जारी की है।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ‘हम नहीं जानते कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद क्या है। हम किसी भी अखाड़े का अपमान नहीं कर रहे हैं। जो लिस्ट बनाई गई है क्या उसमें बाबाओं का पक्ष सुना गया था? यह हम नही जानते। ये किसी कॉन्ट्रैक्टर की सूची नही है कि उसे ब्लैकलिस्ट किया जाए।’ केस में याचिककर्ता ने राम रहीम का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे बाबाओं की सूची है जिसमें कई लोग दोषी और कई भगोड़े हैं। CJI ने कहा कि ‘हम इस बाबत कुछ नहीं कर सकते. आप केंद्र सरकार को ज्ञापन दे वो इसे देखेंगे।’ याचिककर्ता ने याचिका वापस ले ली है।

जुलाई में देशभर में फर्जी बाबाओं के 17 आश्रम व अखाड़ों में महिलाओं से संबंधित आपराधिक गतिविधियों के आरोपों और इन आश्रम व अखाड़ों रह रही महिलाओं के बीच कोरोना महामारी फैलने के ख़तरे को लेकर दायर एक युवती के पिता की याचिका को सुप्रीम कोर्ट सुनने के लिए तैयार हुआ था। यह याचिका तेलंगाना निवासी पिता ने दाखिल की थी, जिसमें कहा गया था कि जुलाई 2015 में उनकी बेटी विदेश से डॉक्टरी की उच्च शिक्षा की पढ़ाई करके आई थी, जोकि दिल्ली में एक फर्जी बाबा विरेंद्र दीक्षित के चुंगल में फंस गई और पिछले पांच सालों से इस बाबा के दिल्ली के रोहिणी इलाक़े में बने आश्रम आध्यात्मिक विद्यालय में रह रही है। ये बाबा बलात्कार के आरोप में तीन साल से फ़रार चल रहा है।

इस याचिका में कहा गया था कि ‘अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने देशभर में 17 आश्रम व अखाड़े को फर्जी करार दिया है। जिनमें ज़्यादातर अवैध निर्माण वाली बिल्डिंग में चल रहे हैं, जहां रहने लायक बेसिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इनमें लड़कियां और महिलाएं रह रही हैं जिनकी हालात जेल के क़ैदियों से भी बदतर है। कोरोना संकट काल में इन आश्रम और अखाड़े में कोरोना फैलने का ख़तरा बना हुआ है. इसलिए यहां रह रही लड़कियों और महिलाओं को इन आश्रम व अखाड़ों से सुरक्षित बाहर निकाला जाए।’

कोर्ट ने अब ऐसे आश्रमों को बंद करने वाली मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है।

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