10 साल बाद भाइयों के साथ बहन ने बंद कमरे से बाहर आकर देखा उजाला

70 दिनों के लंबे लॉकडाउन के बाद जब लोग जून अपनी चारदीवारी के बाहर निकले तो उन्होंने लगा मानों वह कई वर्षों बाद कैद से छूटे हैं। लेकिन किसी को दस वर्षों तक एक कमरे में बंद कर दिया जाए तो उसक स्थिति क्या होगी? ऐसा ही हुआ गुजरात के दो भाइयों और एक बहन के साथ, जो दस वर्षों के बाद एक बंद कमरे के बाहर निकाले गए। वे ऐसे कमरे के अंदर बंद थे जहां उन्होंने एक दशक तक सूर्य की रोशनी भी नहीं देखी।

मामला गुजरात के राजकोट का है। रविवार को एक एनजओ ने जब तीनों भाई-बहनों को कमरे से बाहर निकाला गया तो उन्हें देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। कमरे में मानव मल जमा था, चारों तरफ अखबार जमा थे। बासी खाना, दाल और रोटियां बिखरी पड़ी थीं। भाइयों के बाल घुटनों तक बड़े हो चुके थे। उनकी दाढ़ी पेट तक लंबी थी। उनके शरीर पर कपड़े नहीं थे। शरीीर कंकाल हो चुका था। तीनों जमीन पर लेटे हुए थे।

तीनों भाई-बहनों का उनके 80 वर्षीय पिता नवीन मेहता ने अकैडमिक रेकॉर्ड दिखाया, जिसे देखकर हर कोई हैरान था। सबसे बड़ा बेटा (42) बीए एलएलबी करके प्रैक्टिस करता था। सबसे छोटे बेटे ने बीए (अर्थशास्त्र) से किया था और उनकी 39 वर्षीय बहन के पास मनोविज्ञान में एमए की डिग्री थी। सबसे छोटे बेटा क्रिकेटर था और स्थानीय टूर्नामेंट में खेलता था।

नवीन मेहता भी एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी है। वह भी उसी घर में रहते हैं। उन्हें 35,000 रुपये की मासिक पेंशन मिलती है। उसी से वह घर का खर्च चलाते हैं। नवीन ने बताया, ‘मेरी पत्नी की मौत दस साल पहले हो गई थी। उसके बाद दोनों बेटों को बड़ा झटका लगा और उन्होंने खुद को कमरे में बंद कर लिया। बहुत कोशिशों के बाद भी वे बाहर नहीं निकले।’ मेहता ने कहा कि उनके कुछ रिश्तेदारों ने उनके बच्चों पर काला जादू किया है।

एनजीओ के संस्थापक जालपा पटेल ने बताया कि युवती ने कहा कि वह ठीक है लेकिन वह लगातार खाना मांग रही थी। उसने कहा कि वह अपने भाइयों की देखभाल कर लेगी। पटेल ने कहा कि उनके एनजीओ को पड़ोसियों ने फोन करके नवीन मेहता के परिवार के बारे में बताया था। सूचना पर एनजीओ के सदस्य उनके घर किसानपारा इलाके में पहुंचे। यहां उनका घर बाहर से बंद था क्योंकि बुजुर्ग खाने का टिफिन लेने गए थे।

लंबे इंतजार के बाद भी जब कोई नहीं आया तो उन लोगों ने दरवाजे का ताला तोड़ दिया और अंदर दाखिल हो गए। कमरे की और तीनों भाई-बहनों क हालत देखकर वे दंग हो गए। एनजीओ के सदस्यों ने नाई को बुलवाया और उनके बाल कटवाए। दाढ़ी बनवाई। उन लोगों को नहलाया गया और साफ कपड़े पहनाए गए।

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