पुलिस वाले करवा रहे है एससी के लोगों की दुकानों पर कब्जा, शिकायत के बाबजूद नही होती कानूनी कार्यवाही

Himachal News: हिमाचल में अनुसूचित जाति के लोग किस कदर प्रताड़ित है इस बात का पता इस बात से चलता है कि यहां पुलिस के जवान जबरदस्ती और गुंडागर्दी करके दलितों की दुकानों पर कब्जा करवाते है। जब पीड़ित थाने में न्याय के लिए शिकायत करते है तो इनकी तरफ से सही कानूनों में एफआईआर तक दर्ज नही होती। पुलिस गुंडों को बचाने के लिए क्रॉस केस दर्ज करती है और पीड़ितों को और ज्यादा प्रताड़ित करते है। ऐसा ही ताजा मामला कांगड़ा के पंचरुखी से निकल कर सामने आया है। जहां एक पुलिस जवान के साथ मिल कर कुछ गुंडों ने दलित की संपत्ति पर कब्जा किया। उसके बाद जब पुलिस थाने में शिकायत दी गई तो पुलिस ने उल्टा केस दर्ज कर दिया।

आपको बता दें कि भारतीय कानून अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम में प्रावधान है कि अगर कोई भी व्यक्ति दलितों की जमीन पर जबरदस्ती कब्जा करता है, उनको उनके स्वामित्व वाली जमीन से हटाने की कोशिश करता है तो उनके खिलाफ एससी एसटी एक्ट में कानूनी कार्यवाही होती है और पुलिस को तत्काल एफआईआर दर्ज करके अपराधियों को गिरफ्तार करना होता है। यह बात लोकसभा से पारित संशोधित कानून में धारा 18A के तहत लिखी गई है और सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में बाकायदा आदेश दिए है। लेकिन हिमाचल पुलिस को इन सभी कानूनों से कोई फर्क नही पड़ता। वह कानून को ताक पर रख कर मनमर्जी की कानूनी कार्यवाही करती है, जिसके चलते पीड़ित को न्याय नही मिल पाता।

जानकारी के मुताबिक इस केस में भी ऐसा ही हुआ है। पिछले महीने की 29 तारीख को कुछ गुंडों ने एक पुलिस जवान के साथ मिल कर दलित की दुकान पर कब्जा किया, उसको गाड़ी तोड़ी और उसके साथ मारपीट की। उसके बाद पीड़ित ने अश्वनी शर्मा, जगजीवन शर्मा, अनिल कटोच, अशोक शर्मा ओम शर्मा और एक पुलिस के जवान राजेश उर्फ लब्बू आदि के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी। लेकिन पुलिस ने साधारण मुकदमा दर्ज कर मामले को रफा दफा करने का प्रयास किया। जानकारी के मुताबिक, पुलिस मौके पर आई थी। लेकिन उन्होंने कोई सख्त कार्यवाही नही की और गुंडों का सामान दुकान में रखवा दिया।

इतना ही नही उपरोक्त गुंडों ने जातिसूचक शब्दों में गाली गलौच भी किया और मारपीट भी की। आज इस मामले में पीड़ित पुलिस अधीक्षक कांगड़ा से मिले और उनको प्रार्थना पत्र देकर कानूनी कार्यवाही की मांग की।

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