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Plastic Ban: दिल्ली में 1 जुलाई से प्लास्टिक पर लगेगा बैन, 19 चीजों के उत्पादन पर लगेगी रोक

दिल्ली सरकार (Delhi Government) ने प्लास्टिक के बढ़ते इस्तेमाल पर रोक लगाने का फैसला किया है. सरकार ने ‘सिंगल यूज प्लास्टिक‘ ( Single Use Plastic ) को लेकर बड़ा निर्णय लेते हुए इससे बनी चीजों के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध का ऐलान किया है.

इसकी जानकारी दिल्ली पॉल्यूशन कंट्रोल कमिटी (Delhi Pollution Control Committee) की तरफ से जारी एक नोटिफिकेशन में दी गई है.

नोटिफिकेशन के मुताबिक, अगले महीने यानी एक जुलाई से कैंडी स्टिक, प्लेट, कप और कटलरी के आइटम्स सहित टोटल 19 चीजों की मैन्युफेक्चरिंग, एक्सपोर्ट, स्टॉकिंग, डिस्ट्रिब्यूशन, बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगा दी जाएगी. ऐसा प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट (अमेंडमेंट) रूल 2021 के तहत किया गया है. गौरतलब है कि सिंगल-यूज प्लास्टिक की वजह से सबसे ज्यादा प्रदूषण (Air Pollution) होता है, क्योंकि इनका सही तरीके से निपटान नहीं हो पाता. इतना ही नहीं, ये प्लास्टिक रिसाइकल भी नहीं हो पाते.

यहां देखें किन-किन चीजों पर लगेगा प्रतिबंध

केंद्र सरकार ने दिया था निर्देश

मालूम हो कि केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक को बंद करने निर्देश जारी किया था. केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने कहा था कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को देश को सिंगल यूज प्लास्टिक (SUP) से फ्री बनाने के लिए अलग-अलग एक्टिविटीज़ में लगना चाहिए. आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किए जा रहे स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत प्लास्टिक-वेस्ट मैनेजमेंट, जिसमें ‘सिंगल यूज प्लास्टिक’ के इस्तेमाल पर रोक लगाना शामिल है. इसपर खास ध्यान दिया जा रहा है.

पंजाब, पश्चिम बंगाल सरकार ने भी उठाया कदम

बता दें कि पंजाब सरकार ने भी जुलाई से सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है. पंजाब को हरा-भरा और सशक्त बनाने के लिए जुलाई से प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाया जाएगा. वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार ने भी इस दिशा में कदम उठाए हैं. बंगाल में भी एक जुलाई से 75 माइक्रोन से पतले प्लास्टिक बैग के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लग जाएगा. इसको लेकर राज्य में प्लास्टिक थैली बनाने वाली कुल 1026 कंपनियों को निर्देश जारी किया गया है.

हर साल 35 लाख टन प्लास्टिक कचरा हो रहा पैदा

इससे पहले, 5 अप्रैल को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा था कि भारत सालाना 35 लाख टन प्लास्टिक कचरा पैदा कर रहा है. उन्होंने कहा था, ‘प्लास्टिक ऐसे पर्यावरणीय मुद्दों में से एक बन गया है, जिस पर तत्काल कदम उठाने की जरूरत है. भारत सालाना लगभग 35 लाख टन प्लास्टिक कचरा पैदा कर रहा है और प्रति व्यक्ति प्लास्टिक वेस्ट उत्पादन पिछले 5 सालों में लगभग दोगुना हो गया है.’

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