SC के ऐतिहासिक फैसले के बाद 557 महिला अधिकारियों को दिया स्थायी कमीशनः राज्यसभा में बोले अजय भट्ट

सरकार ने सोमवार को शीतकालीन सत्र की कार्यवाही के दौरान सदन को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 557 शॉर्ट-सर्विस कमीशन महिला अधिकारियों को भारतीय सेना में स्थायी कमीशन दिया गया है। किसी भी महिला को स्थायी कमीशन देने में कोई देरी नहीं की गई है। रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

सोमवार को राज्यसभा सदन की कार्यवाही के दौरान रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुरूप 25 नवंबर 2021 तक 63 योग्य महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिया गया है। (यहां वह 12 नवंबर 2021 के आदेश की बात कर रहे थे)।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 12 नवंबर को सेना को अवमानना ​​की कार्यवाही से तब राहत दी जब सेना ने 72 महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने से इनकार करने पर अपना फैसला बदला। सेना ने सुप्रीम कोर्ट को जमा किए हलफनामे में कहा कि वह उन सभी महिला अधिकारियों को देने के लिए तैयार हैं जो योग्य हैं और जिनके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हुई है या लंबित है।

महिला अधिकारियों ने सुप्रीम अदालत में डाली थी याचिका
72 महिला अधिकारियों में से 36 ने इस महीने की शुरुआत में शीर्ष अदालत में अवमानना ​​याचिकाएं दायर की थी। जिन पर न्यायमूर्ति धनंजय वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना की पीठ ने सुनवाई की। इन याचिकाओं में कहा गया है कि भारतीय सेना शीर्ष अदालत के 25 मार्च के आदेश की अवमानना ​​कर रही है, जिसमें कहा गया है कि सभी महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी जो 60% योग्यता के साथ अर्हता प्राप्त करते हैं, चिकित्सकीय रूप से फिट हैं और अनुशासनात्मक और सतर्कता मंजूरी हासिल कर चुके हैं लेकिन उन्हें अभी तक सेना ने मंजूरी नहीं दी है।

यहां समझिए पूरा मामला
514 महिला अधिकारियों ने 60% बेंचमार्क के आधार पर शॉर्ट सर्विस के लिए अर्हता प्राप्त की, जिनमें से 442 को स्थायी कमीशन दिया गया। अन्य 72 को सितंबर 2020 में हुई चयन बोर्ड द्वारा स्थायी कमीशन से इनकार किया गया था। एक अधिकारी ने सेवा से समय से पहले रिटायरमेंट का विकल्प चुना, जिसके बाद महिला अधिकारियों की संख्या 71 हो गई थी।

12 नवंबर को रक्षा मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा प्रस्तुत किया था जिसमें कहा गया था कि 36 अधिकारियों में से 21 को समीक्षा पर स्थायी कमीशन दिया गया है और इस संबंध में उन्हें 29 अक्टूबर को पत्र जारी किए गए थे। एक अधिकारी का मामला विचाराधीन था। हलफनामे में कहा गया है कि इनमें से तीन चिकित्सकीय रूप से अनुपयुक्त पाए गए, जबकि 11 अन्य के खिलाफ गंभीर आपत्तियां थीं।

शीर्ष अदालत के दवाब के बाद सेना इन 11 को भी स्थायी कमीशन देने के लिए सहमत हुई और इसी तरह उन 36 अन्य लोगों के मामले पर भी विचार किया गया, जिन्होंने अवमानना ​​​​याचिका दायर नहीं की थी।

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