मुख्यमंत्री के गृह जिले में मनरेगा मजदूरों को आवेदन के बाबजूद नही मिल रहा काम

हिमाचल में सरकार रोजगार के दिलाने के जितने मर्जी दावे आकर ले, लेकिन धरातल पर स्थिति बेहद चिंताजनक है। हिमाचल के पंचायतीराज विभाग मनरेगा मजदूरों को काम दिलाने में पूरी तरह नाकाम होता नजर आ रहा है। ऐसा ही मामला मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र सराज के बालीचौकी ब्लॉक से निकल कर सामने आया है। जहां हजारों मजदूरों ने मनरेगा के कार्यों के लिए आवेदन किया है लेकिन पंचायतीराज विभाग वहां मजदूरों को काम देने में पूरी तरह असफल रहा है।

इस मामले में समाजसेवी संत राम का कहना है कि बालीचौकी ब्लॉक में हजारों मनरेगा कामगारों ने काम के लिए आवेदन किया हुआ है जिन्हें समय पर काम नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत पंजाई के वार्ड डोभा में 207 कामगारों ने काम के लिएआवेदन किया हुआ है। इसी तरह ग्राम पंचायत सुधराणी में लगभग 350 कामगारों ने काम के लिए आवेदन किया हुआ है तथा क्षेत्र की अन्य पंचायतों में भी मनरेगा कामगारों ने काम के लिए आवेदन किया हुआ है। लेकिन आज तक उनको पंचायत की ओर से काम नही दिया गया है।

संत राम का कहना है कि मनरेगा अपने आप में बेहद शानदार योजना है लेकिन हमारी सरकार और पंचायतें मनरेगा को सही से लागू करने में बुरी तरह नाकाम रही है। उन्होंने बताया कि मनरेगा में मजदूरों को काम देना पंचायत की जिमेवारी है। आम लोगों को केवल आवेदन करके काम मांगना होता है। अगर पंचायत लोगों को काम देने में असफल रहती है तो उनको बेरोजगारी भत्ता देना पड़ता है। उन्होंने बताया कि मजदूरों की इस हालत के लिए सरकार पूरी तरह जिमेवार है, क्योंकि सरकार ने सही से और पूरी जिमेवारी से लोगों में मनरेगा के प्रचार प्रसार नही किया है।

संत राम ने विकास खंड अधिकारी से मांग की है कि जिन जिन कामगारों ने मनरेगा में काम के लिए आवेदन किया है उनको काम नही दिए जाने की दशा में बेरोजगारी भत्ता दिया जाना चाहिए। ताकि वह लोग महामारी के इस दौर में अपने परिवारों का भरण पोषण कर सके।

कोरोना महामारी के दौर में मनरेगा कार्यों को शुरू करवाने के लिए आज विकास खंड अधिकारी बाली चौकी से मिला और इस दौरान ग्राम पंचायत सुधराणी के लिए 55 लाख रुपए के विभिन्न कार्यों की स्वीकृतियां भी ली।
-संत राम

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