टावर लाइन द्वारा किसानों की जमीन पर जबर्दस्ती कब्जे के खिलाफ पांचवे दिन भी धरना जारी

आज भारतीय किसान यूनियन व टावर लाइन शोषित जागरूकता मंच के बैनर तले एकजुट होकर अनिल अंबानी की सहयोगी कंपनी पार्वती कोलडैम ट्रांसमिशन कंपनी जिसने कुल्लू से लुधियाना तक अपनी लाइन बिना अधिग्रहण, बिना मुआवजा तथा बिना सरकारी व पंचायत स्तर पर सवीकृतियों के ट्रांसमिशन लाइन को बिछाया है। जिसके खिलाफ उपायुक्त बिलासपुर द्वारा वर्ष 2015 में मैजिस्ट्रेट इंक्वायरी में भारी अनियमितताएं सामने आ चुकी है। जिस पर कंपनी के राजनीतिक दबाव की वजह से आज दिन तक हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा कोई भी कार्यवाही अमल में नहीं लाई गई है।

किसानों के धरने में क्षेत्र के किसी के सभी सामाजिक लोगों द्वारा भी पहुंचकर दिल्ली के चारों बॉर्डर पर बैठे किसानों को समर्थन दिया जा रहा है। मुख्य रूप से बीडीसी के पूर्व उपाध्यक्ष रतन लाल ठाकुर, मार्कण्ड माकड़ी पंचायत के पूर्व उप प्रधान कमल ठाकुर, कोटला पंचायत के पूर्व उप प्रधान सुमन ठाकुर, हरीराम धीमान, अभिषेक, पूर्व उपप्रधान कालाराम आदि ने ट्रांसमिशन लाइन प्रभावित व विस्थापित किसानों की मांगों को जायज ठहराया व दिल्ली में बैठे किसानों की मांगों को प्राथमिकता के आधार पर अति शीघ्र निर्णय लिया जाए।

प्रभावित किसानों द्वारा कृषि अध्यादेश के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन को समर्थन करने हेतु चल रहे क्रमिक धरना पांचवे दिन में प्रवेश कर गया।
पिछले 5 दिनों से राष्ट्रीय किसान आंदोलन के समर्थन हेतु तथा केंद्र सरकार की जन विरोधी और किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ ट्रांसमिशन लाइनों के प्रभावित व विस्थापित किसान इंडियन टेलीग्राफ एक्ट 1885 को भी देशहित व किसान हित में खारिज करने की मांग वर्षों से कर रहे हैं। क्योंकि यह एक्ट अंग्रेजों के जमाने में अंग्रेजों के द्वारा बनाया गया था।

भारतीय किसान यूनियन के हिमाचल संयोजक व टावर लाइन शोषित जागरूकता मंच के संस्थापक सदस्य व राष्ट्रीय संयोजक अधिवक्ता रजनीश शर्मा ने कहा कि चंद उद्योग पतियों को राजनीतिक रूप से फायदााा पहुंचाने के लिए अंग्रेजों के जमाने में आम जनता की मिलकियत जमीन, घरों, दुकानों व मवेशी खानों के ऊपर से जबरदस्ती बिना भूमि अधिग्रहण के बिजली की लाइनों को बिछाने के लिए जो कानून बनाया था वह आज 21 वीं सदी में भी जारी है।

सरकारों, राजनैतिक दलों व केंद्रीय विभागों द्वारा बड़ी चालाकी से गरीब किसानों की जमीन पर इंडियन टेलीग्राफ एक्ट एक्ट की आड़ में बिजली के बड़े-बड़े ट्रांसमिशन लाइन बिना भूमि अधिग्रहण के बिछाई जा रहे हैं। जबकि हैरानी की बात है कि 1885 में हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों की खोज भी नहीं हुई थी।

लेकिन यह गोरखधंधा गरीब किसान को जबरदस्ती, अपराधिक षड्यंत्र के द्वारा,सरकारों के दबाव में बिना उचित कानून बनाकर लाखों किसानों को भूमिहीन किया जा रहा है। प्रदेश सरकार, केंद्र सरकार व ऊर्जा विभाग द्वारा आज तक ट्रांसमिशन लाइनों के नीचे रह रहे प्रभावित परिवारों व विस्थापित लोगों की पहचान नहीं की गई है, और ना ही तारों व टावरों के नीचे की मलकियत जमीन का अधिग्रहण करने हेतु प्राइवेट उद्योगपतियों से बिजली के टावरों व तारों का किराया दिलाने का कोई प्रधान विधानसभा या लोकसभा में बनाया गया है।

आज धरने पर शिवम् ठाकुर, ध्रुव, गोल्डी, करण, रीना ठाकुर, मोनू ठाकुर, बाबू राम ठाकुर, रूप लाल, प्रेम लाल भडॉल, हीरा लाल, जगदीश, गोपाल नेगी, प्रकाश ठाकुर, नीतिश ठाकुर, सुनीता ठाकुर, मौजूद रहे।

Please Share this news:
error: Content is protected !!