केंद्र ने हाईकोर्ट को बताया, व्हाट्सएप की निजता पॉलिसी भारतीय आईटी कानून के अनुरूप नहीं।

सार
केंद्र को व्हाट्सएप के सीईओ मार्क जुकरबर्ग के जवाब का है इंतजार
व्हाट्सएप की नई गोपनीयता नीति से संबंधित याचिकाओं पर 3 जून को होगी अगली सुनवाई

विस्तार
केंद्र ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि वह व्हाट्सएप की नई गोपनीयता नीति को भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कानून और नियमों के उल्लंघन के रूप में देखता है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को यह स्पष्ट करने के लिए निर्देश मांगता है।

व्हाट्सएप की नई गोपनीयता नीति को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ के समक्ष केंद्र सरकार ने दावा किया गया था कि नई नीति को 15 मई से लागू कर दिया गया है और इसे टाला नहीं गया है।

15 मई से लागू हुई नई नीति: व्हाट्सएप

व्हाट्सएप ने पीठ को बताया कि उसकी नई गोपनीयता नीति 15 मई से प्रभावी हो गई है, लेकिन वह उन उपयोगकर्ताओं के खातों को हटाना शुरू नहीं करेगा जिन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया है और उन्हें बोर्ड में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास करेंगे।

व्हाट्सएप ने कहा कि कोई सार्वभौमिक या समान समय सीमा नहीं थी, जिसके बाद वह खातों को हटाना शुरू कर देगा क्योंकि प्रत्येक उपयोगकर्ता को मामला-दर-मामला आधार पर निपटाया जाएगा।

सीईओ मार्क जुकरबर्ग के जवाब का है इंतजार: केंद्र
सुनवाई के दौरान केंद्र ने कहा कि उसके अनुसार यह नीति भारतीय आईटी कानूनों और नियमों का उल्लंघन है। केंद्र ने कहा कि उसने इस मुद्दे पर फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग को लिखा है और जवाब की प्रतीक्षा है। तब तक नीति के कार्यान्वयन के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने की आवश्यकता है।

व्हाट्सएप ने विवाद का विरोध करते हुए कहा कि यह भारतीय आईटी कानून और नियमों के अनुरूप है और यह नीति 15 मई से लागू हो गई है, लेकिन यह तुरंत खातों को नहीं हटाएगा। जब मामले को शुरू में एकल न्यायाधीश के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था।

तो केंद्र ने कहा था कि व्हाट्सएप अपनी नई गोपनीयता नीति में भारतीय और यूरोपीय उपयोगकर्ताओं में फर्क कर रहा है। दरअसल, एक वकील की ओर से दायर याचिका में यह दावा किया गया है कि कंपनी की नई नीति संविधान के तहत उपयोगकर्ताओं के निजता के अधिकार का उल्लंघन करती है। पीठ ने इस पर केंद्र, फेसबुक और व्हाट्सएप को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। इस मुद्दे पर अगली सुनवाई तीन जून को होगी।

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