शिमला में जेबीटी और डीएलएड प्रशिक्षुओं का धरना प्रदर्शन, पुलिस ने सचिवालय जाने से रोका

हिमाचल प्रदेश बेरोजगार जेबीटी और डीएलएड प्रशिक्षु संघ की ओर से मांगों को लेकर मंगलवार को शिमला में विरोध प्रदर्शन किया गया। प्रशिक्षु बड़ी संख्या में टॉलैंड में एकत्रित हुए और जमकर नारेबाजी की। हाईकोर्ट से बीएड डिग्री धारकों को जेबीटी भर्ती के लिए पात्र बनाने का फैसला आने से जेबीटी, डीएलएड प्रशिक्षु नाराज हैं। इसके चलते सैंकड़ों प्रशिक्षुओं ने यहां पहुंच कर विरोध प्रदर्शन किया। हालांकि उनकी योजना राज्य सचिवालय के बाहर प्रदर्शन करने की थी लेकिन पुलिस की ओर से उन्हें टॉलैंड से आगे नहीं जाने दिया गया। ऐसे में प्रशिक्षु टॉलैंड में ही धरने पर बैठ गए हैं। प्रशिक्षुओं के प्रदर्शन को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर तैनात किया गया।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की मांग

जेबीटी प्रशिक्षु सरकार से मांग कर रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट में उनके पक्ष में याचिका दायर की जाए। प्रशिक्षुओं का कहना है कि भर्ती में बीएड डिग्री धारकों के आने से उनका नंबर नहीं आएगा। अपने हक के लिए वे न्यायिक लड़ाई लड़ेंगे। संघ के अध्यक्ष अभिषेक ठाकुर ने कहा कि शिमला में हुए इस प्रदर्शन में प्रदेश भर से जेबीटी और डीएलएड प्रशिक्षुओं ने भाग लिया। सभी डाईट केंद्रों में प्रशिक्षुओं का लगातार तीसरे दिन भी कक्षाओं का बहिष्कार जारी रहा है। यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी तो यह आंदोलन जारी रहेगा।

राजधानी में यातायात रहा प्रभावित

प्रशिक्षुओं ने सुबह 11 बजे से सायं 5 बजे तक टॉलैंड में धरना दिया। इससे छोटा शिमला, खलीनी-बीसीएस, मैहली, पंथाघाटी, संजौली और पुराना बस स्टैंड के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ। हालांकि सुबह के समय लोगों को यहां दिक्कतें आईं। पूरा दिन प्रशिक्षु टॉलैंड में धरने पर बैठे रहे। 

जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार : मुख्यमंत्री

इस बीच जेबीटी और डीएलएड प्रशिक्षुओं का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मिला। मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि इस मामले में समीक्षा की जाएगी। यदि जरूरत पड़ी तो सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट जा सकती है।

40 हजार से अधिक जेबीटी नौकरी के इंतजार में

प्रशिक्षुओं का कहना है कि इस समय प्रदेश में 40 हजार से अधिक जेबीटी व डीएलएड प्रशिक्षु नौकरी के इंतजार में हैं। यदि इस भर्ती में बीएड वाले शामिल होंगे तो उनका नौकरी का सपना ही रह जाएगा।

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