गैस में सुरक्षित है संविधान की मूलप्रति; जाने वजह

भारत इस बार 26 जनवरी को अपना 72वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है। इस दिन भारत के राष्ट्रपति द्वारा इंडिया गेट पर भारतीय राष्ट्र ध्वज को फहराया जाता हैं और इसके बाद सामूहिक रूप में खड़े होकर राष्ट्रगान गाया जाता है। फिर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को सलामी दिया जाता है। गणतंत्र दिवस को पूरे देश में विशेष रूप से भारत की राजधानी दिल्ली में बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। 

गणतंत्र दिवस मनाने की वजह तो देश के सभी नागरिक को पता है लेकिन क्या आपने सोचा है कि भारतीय संविधान सभा ने तो 26 नवंबर 1949 को ही संविधान को अपना लिया था। तो फिर इसे लागू 26 जनवरी 1950 को क्यों किया गया? क्या आप जानते हैं कि भारत के संविधान की मूल प्रति नाइट्रोजन गैस की एक चेम्बर में रखी है? लेकिन क्यों? आइए जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब…

  • संविधान लागू करने के लिए 26 जनवरी का दिन ही इसलिए चुना गया, क्योंकि साल 1930 में इसी दिन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत को पूर्ण स्वराज घोषित किया था।
  • बता दें कि दुनिया में भारत का ही संविधान है, जो हाथ से बने कागज पर हाथ से लिखा हुआ है।
  • संविधान के हर पन्ने पर सोने की पत्तियों वाली फ्रेम बनी है। साथ ही हर अध्याय के आरंभिक पृष्ठ पर एक कलाकृति भी बनाई गई है। 
  • संविधान की मूल प्रति को पहले फलालेन के कपड़े में लपेटकर नेफ्थलीन बॉल्स के साथ रखा गया था।
  • लेकिन जांच के बाद पाया गया कि संविधान की प्रति यहां सुरक्षित नहीं थी 
  • 1994 में संसद भवन के पुस्तकालय में इसे वैज्ञानिक विधि से तैयार चेम्बर में सुरक्षित कर दिया गया।
  • इसे और भी सुरक्षित बनाने के लिए  ऐसी गैस की आवश्यकता थी, जो कागज के साथ किसी भी तरह की प्रतिक्रिया न करती हो।
  • चूकि भारतीय संविधान काली स्याही से लिखा है, लिहाजा ये आसानी से उड़ (ऑक्सीडाइज) सकती थी। इसलिए नाइट्रोजन को सबसे उपयुक्त माना गया। 
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