वोटर लिस्ट में नाम नही होने पर भी हो गया नामांकन; निवार्चन अधिकारी की बड़ी चूक

हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज चुनावों में आम आदमी के लोकतांत्रिक अधिकर इस हद तक दबाएं गए है जिसकी कोई कल्पना भी नही कर सकता। इस बार सैकड़ों लोग पंचायत चुनावों से इसलिए बाहर है क्योंकि उनके नाम वोटर लिस्ट में नही है। इस तरह के सैकड़ों मामले सामने आ चुके है और लोगों ने शिकायतें भी दर्ज करवाई है।

ताजा मामला बथेरी पंचायत का है जहां एक उपप्रधान का वोटर लिस्ट में नाम नही होने पर भी नामांकन हो गया और उसको चुनाव चिन्ह भी दे दिया गया है। जहां सैकड़ों लोग वोटर लिस्ट में नाम नही होने के चलते चुनावों से और वोट देने के अधिकर से बाहर हुए है, ऐसे में निर्वाचन अधिकरी द्वारा वोटर लिस्ट में नाम ना होने वाले को चुनाव चिन्ह दे देना हिमाचल में बहुत बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रहा है।
आम लोगों का कहना है कि वर्तमान सरकार जानबूझ कर योग्य और विपक्ष के उम्मीदवारों को चुनाव से बाहर रखने के लिए यह साजिश कर रही है। ताकि योग्य लोग चुनावों में प्रतिद्वंद्वी के रूप में खड़े भी ना हो सके और उनको आसान जीत मिल जाए।

बथेरी पंचायत के मामले में वर्तमान उपप्रधान ने इस संबंध में उपायुक्त मंडी, डीपीओ मंडी और बीडीओ पधर को लिखित शिकायत भेजी है। उनका कहना है कि पूरी पंचायत के लोग इस लापरवाही की घोर निंदा करते है और नामांकन रद्द करने की मांग की है। अब देखना यह होगा कि क्या मंडी प्रशासन इस मामले में एआरओ को निलंबित करके कानून और संवैधानिक व्यवस्था को बचाता है या फिर यह चुनाव ऐसे ही कानून और संविधान को ताक पर रख कर करवाए जाएंगे।

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