कोरोना के नाम पर अधिक धन वसूल रहे निजी अस्पतालों पर होगी कार्रवाई

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की बेंच की ओर से जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के सचिवों को निर्देश दिए गए हैं कि वे कोविड-19 महामारी के कारण उत्पन्न शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए गठित समिति/नोडल एजेंसियों का हिस्सा बनें। बेंच में जस्टिस राजन गुप्ता और जस्टिस करमजीत सिंह शामिल हैं।

मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण सचिव अनुराधा ने शनिवार को बताया कि गठित समिति/नोडल एजेंसियों में उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, नगर काउंसिल/निगम के प्रतिनिधि व सिविल सर्जन शामिल होंगे। बेंच के आदेशानुसार, यदि आवश्यक हो तो समिति की बैठक दैनिक आधार पर इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से आयोजित की जाए। समिति के सदस्यों में से किसी के द्वारा हेल्पलाइन नंबर पर कॉल आने पर प्रशासन द्वारा तुरंत प्रतिक्रिया भी दी जाए।

पंजाब के अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा कि राज्य को इस तरह की समिति के गठन पर और जनता की शिकायतों पर विचार करने के लिए हर जिले में एक विशेष नंबर निर्दिष्ट करने में कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने इस बात को स्वीकार किया है कि एक निर्दिष्ट हेल्पलाइन नंबर 104 पहले ही जारी की जा चुकी है जो जनता की सभी प्रकार की शिकायतों का निवारण करती है।बेंच के संज्ञान में लाया गया कि कुछ निजी अस्पताल कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए अत्यधिक फीस ले रहे हैं और जनता को गुमराह कर रहे हैं। इस तरह की शिकायत पर तुरंत गौर किया जाएगा और यदि आवश्यकता पड़ी तो ऐसे निजी अस्पताल और चिकित्सा संस्थानों के खिलाफ दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे।

इस तरह के कॉल में अटेंड करने के लिए समुचित कर्मियों की प्रतिनियुक्ति की जाएगी और आस-पास के क्षेत्र में पीसीआर/बीट्स को भी सक्रिय किया जाएगा। मौजूदा महामारी की स्थिति में जनता में विश्वास पैदा करने के लिए और जनता को जागरूक करने के लिए नामित हेल्पलाइन नंबरों का व्यापक प्रचार इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया पर किया जाएगा।

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