गुड़िया रेप और मर्डर केस; जानिए गुड़िया की हत्या से सजा तक की पूरी कहानी

हिमाचल प्रदेश में 4 जुलाई, 2017 को जिला शिमला के कोटखाई थाने के तहत 16 साल की छात्रा के साथ हुए दुष्‍कर्म और हत्या जैसे जघन्य अपराध में जांच की प्रणाली निर्भया कांड जैसी ही रही। जिस तरह निर्भया मामले में जांच का माध्यम पूरी तरह वैज्ञानिक रखा गया, उससे पांच साल बाद हुए इस मामले में भी जांच का वही तरीका अख्तियार किया गया।

इस मामले में आरोपी अंधेरे में तीर मार रही सीबीआइ के हाथ कभी नहीं आता अगर डीएनए जांच का सहारा नहीं लिया जाता। पेशे से चिरानी नीलू इतना शातिर निकला कि वारदात को अंजाम देने के बाद वहीं आस पास के इलाकों में घूमता रहा लेकिन किसी को संदेह तक होने नहीं दिया। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि शराब के आदी नीलू चिरानी ने गुड़िया के साथ इस जघन्यतम अपराध करने के बाद छह जुलाई को एक अन्य प्रवासी महिला के साथ बलात्कार करने की कोशिश की थी।

सीबीआइ जांच के दौरान इस महिला ने बतौर गवाह कहा कि उसने नीलू को डंडे से मारकर खुद को बचा लिया। लेकिन इस मामले को न तो पुलिस में शिकायत दर्ज हुई और न पड़ोसी से किसी ने पूछताछ की।

सीबीआइ ने इस बीच 250 लोगों के खून के नमूने लिए व जांच के लिए भेजे। इस दौरान सीबीआइ को पता चला कि इस इलाके में प्रवासी मजदूरों व चिरानियों में से केवल नीलू उर्फ अनिल उर्फ कमलेश ही गायब है। सीबीआइ ने शक के आधार पर उसकी मां के खून के नमूने लेकर उन्हें जांच के लिए भेज दिया। इस बीच नीलू के मां के डीएनए का मिलान गुड़िया (काल्पनिक नाम ) के कपड़ों से लिए नमूनों से हो गया तो सीबीआइ ने नीलू की तलाश शुरू कर दी। उसके तमाम रिश्तेदारों व जहां वह काम करता था, उनके मोबाइल पर निगरानी रखनी शुरू कर दी और नीलू को 13 अप्रैल, 2018 को गिरफ्तार कर लिया गया। प्रदेश हाईकोर्ट की निगरानी में चली इस जांच के बाद सीबीआइ ने आरोपी नीलू खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर दिया। सीबीआइ के आरोप पत्र के मुताबिक नीलू ने शराब के नशे में बडी बेरहमी से गुड़िया को मारा था।

चार जुलाई का दिन बड़ा ही मनहूस था। गुड़िया के स्कूल में खेल प्रतियोगिताएं चली हुई थी। उसकी एक सहेली जिसे आठ जुलाई 2017 से आठवीं से दसवीं कक्षाओं के बच्चों की होने वाली खेल प्रतियोगिता में भाग लेना था, उसने जाने से इंकार कर दिया। तब अध्यापकों ने गुड़िया को उसकी जगह खेल प्रतियोगिता में भाग लेने को कहा। सीबीआइ जांच के मुताबिक स्कूल से कुछ दूरी पर नीलू उसे मिल गया व नीलू ने उससे गलत बात कह डाली, जिस पर उसने नीलू के मुंह पर थूक दिया। इसके बाद नीलू ने उसके साथ बलात्कार किया व उसका मुंह बंद कर और उसका गला घोंट कर उसकी बडी बेरहमी से हत्या कर दी। पोस्टमार्टम में बलात्कार व हत्या की पुष्टि होने के बाद गुस्साई जनता सड़कों पर उतर आई और सरकार ने दस जुलाई को आइजी जहूर हेदर जैदी की निगरानी में एसआइटी का गठन किया।

इस एसआइटी ने छह प्रवासी मजदूरों को इस मामले में गिरफ्तार कर मामले को सुलझाने का दावा किया लेकिन पुलिस का यह दावा किसी के गले नहीं उतरा। इस दौरान 18 व 19 जुलाई की रात को छह आरोपियों में से एक सूरज की कोटखाई थाने में पुलिस हिरासत में हत्या हो गई। पुलिस ने हत्या का इल्जाम दूसरे आरोपियों पर लगा दिया। इसके बाद तो जनता उग्र हो गई और हाईकोर्ट को सीबीआइ जांच के आदेश देने पड़े।

इस दौरान स्थानीय लोगों ने पुलिस और सीबीआइ को नीलू के बारे में बताया कि वह इस इलाके में देखा गया है। लेकिन न पुलिस ने और न ही सीबीआइ ने बावत ज्यादा ध्यान दिया। सीबीआइ ने वैज्ञानिक आधार पर सबूत जुटाने का फैसला लिया । सीबीआइ की ओर से जुटाए गए परिस्थिकिीय साक्ष्यों और डीएनए के मिलान को अकाट्य सबूत मानने के बाद सीबआइ के विशेष जज राजीव भारद्वाज ने नीलू को भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 376ए और पोक्सो अधिनियम की धारा 4 के तहत दोषी करार देते हुए 18 जून को आजीवन कारावास की सजा सुना दी।

गुडिया बलात्कार व हत्या मामले में सीबीआइ ने बेशक डीएनए के आधार पर आरोपी नीलू को सजा दिला दी हो लेकिन गुड़िया के माता पिता इससे संतुष्ट नहीं हंै। गुड़िया के पिता केशव राम का कहना है कि यह एक अकेले आदमी का काम नहीं हो सकता। अगर नीलू दोषी है तो उसे गोली मार दी जाए या फांसी पर लटका दिया जाए। अदालत का फैसला आने से पहले ही गुड़िया के परिजन इस मामले में अन्य संदिग्ध आरोपियों को पकड़वाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट जा चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर करने के निर्देश दिए है। इन्होंने इस बावत याचिका हाईकोर्ट में दायर कर रखी है।

इस मामले की शुरू में जांच कर रही एसआइटी के मुखिया आइजी जहूर हैदर जैदी को सुप्रीम कोर्ट से लेकर निचली अदालतें जमानत नहीं दे रही है। इस मामले में प्रदेश सरकार की ओर से गठित एसआइटी ने एक स्थानीय युवक व छह प्रवासी मजदूरों गिरफ्तार कर लिया। इनमें से एक प्रवासी सूरज की 18 व 19 जुलाई, 2017 को पुलिस हिरासत में कोटखाई थाने में मौत हो गई। पुलिस ने आरोप लगाया कि इसकी हत्या उसके साथियों ने की है। लेकिन बाद में सीबीआइ जांच में सामने आया कि सूरज की हत्या उसके साथियों ने पहीं बल्कि पुलिस की पिटाई में हुई थी। सीबीआइ ने इस मामले में आइजी जैदी, ठियोग के तत्कालीन डीएसपी मनोजजोशी, एसएचओ राजेंद्र समेत आठ पुलिस कर्मियों व अधिकारियों को गिरफ्तार किया।

सीबीआइ ने इनके खिलाफ भी आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। जिसमें कहा गया है कि सूरज की मौत के बाद दोषी पुलिस कर्मियों पर हत्या का मामला दर्ज करने के बजाय जैदी समेत सबने इस मामले में सच्चाई को छिपाया व निर्दोष प्रवासियों को फंसा दिया। इस बीच चालान पेश होने के बाद बारी-बारी से जैदी समेत सभी को जमानत मिल गई।

इस मामले में गवाह शिमला की एसपी सौम्या सांबशिवन ने जैदी पर इल्जाम लगा दिया कि उसने उसे अपने पक्ष में बयान देने के लिए प्रभावित करने की कोशिश की है। सीबीआइ ने इस पर जैदी की जमानत रद्द करने की अर्जी दाखिल कर दी व अदालत ने इसे गंभीर मामला बताते हुए उसकी जमानत रद्द कर दी। जैदी चंडीगढ़ में बुड़ैल जेल में है।

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