2015 के बाद भर्ती हुए जवानों का शोषण करना बन्द करे सरकार – रवि कुमार दलित

हिमाचल प्रदेश के कुफरी में पुलिस की गाड़ी के हादसे मामले में भले ही सरकार, नेता, विधायक, मंत्री और सांसद चुप है लेकिन समाज सेवकों ने पुलिस के जवानों के हित में आवाज उठाना शुरू कर दिया है। आपको बता दें कि इस हादसे में एक जवान वीरेंद्र की कॉर्ड में चोट लगने से उसकी मृत्यु हो चुकी है। जिसके चलते सामाजिक कार्यकर्ताओं ने 2015 के बाद भर्ती हुए जवानों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरकार, प्रशासन और पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों से पुलिस अनुबंध का समय 8 साल के स्थान पर 3 साल करने और उनको भी दूसरे कर्मचारियों की तर्ज पर वेतन देने की मांग बुलंद कर दी है।

शिमला के प्रसिद्ध समाज सेवी रवि कुमार दलित ने वीरेंद्र की शहादत पर सरकार को घेरा है और सरकार से मांग की है कि शिमला में रेस्क्यू के दौरान दुर्घटना के शिकार हर वीरेंद्र के परिवार में किसी एक को सरकारी नौकरी, 50 लाख मुआवजा और शाहिद का दर्जा दे। उनका कहना है कि 2015 के बाद पुलिस में भर्ती हुए सभी जवानों का सरकार, प्रशासन और पुलिस के3 आला अधिकारी जम कर शोषण को करते है लेकिन उनके अधिकारों को लेकर कोई बात नही करता। जबकि उनके बराबर के कर्मचारियों को उन्सर ज्यादा वेतन, भते और सुविधाएं मिलती है। जबकि संविधान सभी को बराबरी का अधिकर देता है और सरकार को चाहिए कि तत्काल इस विषय में सोचे और नव नियुक्त सभी पुलिस के जवानों के साथ संविधान के आधार पर न्याय करे।

उन्होंने यह भी कहा कि यह बड़े शर्म की बात है कि एक पुलिस का जवान आम जनता की सेवा करते हुए शहीद हो गया लेकिन किसी नेता, सांसद, मुख्यमंत्री या मंत्री ने उसके अंतिम संस्कार में शिरकत करना जरूरी नही समझा। जबकि इनको पुलिस की सेवाएं 24 घंटे चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग का अपने ही जवानों के प्रति रवैया कतई सही नही है। पुलिस महानिदेशक छोड़ो वीरेंद्र की अंत्योष्टि में पुलिस अधीक्षक से ऊपर रैंक का एक भी अधिकारी नजर नही आया। पुलिस अधिकारियों का अपने ही कर्मचारियों का यह रवैया किसी भी तरह के शोषण से कम नही है।

रवि कुमार दलित ने हिमाचल प्रदेश सरकार तो चेतावनी देते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश की भाजपा सरकार अपने मंत्रियों और उनके रिश्तेदारों के लिए तो तुरंत हैली एम्बुलेंस का प्रबंध कर देती है। पूर्व मुख्यमंत्री बीमार हुए तो उनको सही सुविधाएं नही मिलने पर दूसरे हॉस्पिटल भेजा गया। लेकिन एक पुलिस के जवान को बचाने के लिए वह कुछ नही कर सके। ना अच्छे हॉस्पिटल भेजा गया और ना ही कोई अतिरिक्त कोशिशें की गई। अगर यह जवान नियमित कर्मचारियों में से एक होता तो शायद हॉस्पिटल बदलता या फिर अपने को बचाने के लिए अतिरिक्त कोशिशें करता, लेकिन सरकार की उदासीनता के चलते उसको अपनी जान से हाथ धोने पड़े।

रवि कुमार ने कहा कि पुलिस के जवान अनुशासन और कानून के कारण कुछ नही बोल पाते। जिसका सरकार फायदा उठा रही है लेकिन अब यह बर्दास्त नही किया जाएगा। अगर पुलिस जवान अनुशासन के बंधे हैं तो हम भी उनके सहयोग के लिए विरोध करने से पीछे नहीं हटेंगे हम पुलिस प्रदेश मुख्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन करने से भी गुरेज नहीं करेंगे।

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