शीतकालीन सत्र: कृषि कानूनों की वापसी के लिए बिल लाएगी सरकार, MSP पर विपक्ष लामबंद

संसद का शीतकालीन सत्र आज से शुरू होने जा रहा है. पहले ही दिन बड़े हंगामे के आसार दिखाई पड़ रहे हैं. कृषि कानूनों की वापसी पर सरकार जरूर झुक चुकी है, लेकिन अब विपक्ष सदन में एमएसपी का मुद्दा उठाने जा रहा है. इसके अलावा कोरोना मृतकों को मुआवजा और महंगाई के मुद्दे पर भी सरकार घेरने की तैयारी है.

आज शीतकालीन सत्र का पहला दिन

बताया जा रहा है कि आज ही सदन में तीनों कृषि कानून को वापस करने के लिए सरकार बिल पेश करेगी. ऐसे में सरकार जल्द ही पीएम मोदी द्वारा किए गए वादे को पूरा कर सकती है. लेकिन इस वादे के बावजूद भी सदन में जमकर हंगामा हो सकता है. विपक्षी पार्टियों की तरफ से फैसला कर लिया गया है कि अब वे MSP कानून को लेकर सरकार पर दवाब बनाएंगे. इसके अलावा बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दाम को लेकर भी सरकार के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी.

विपक्ष किन मुद्दों पर घेरेगा?

अब इन सभी मुद्दों को लेकर रविवार को हुई सर्वदलीय बैठक में भी हंगामा देखने को मिल गया. उस बैठक में विपक्ष ने साफ कर दिया कि वे अपनी मांगों लेकर मजबूती से खड़े रहेंगे. इस बारे में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा है कि हमारी तरफ से सर्वदलीय बैठक में महंगाई, किसान और कोरोना जैसे मुद्दे उठाए गए थे. सभी पार्टियों ने मांग की है कि MSP के लिए कानून बनाया जाए. इसके अलावा ये भी मांग रख दी गई है कि कोरोना मृतकों के परिवार को चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए.

कांग्रेस नेता ने इस बात का भी अंदेशा जताया है कि सरकार फिर कुछ बदलाव कर कृषि कानूनों को वापस ला सकती है. इस बारे में वे कहते हैं कि सरकार ने कृषि कानून वापस जरूर लिए हैं लेकिन पीएम मोदी खुद मान रहे हैं कि वे अपना संदेश ठीक तरीके से किसानों को समझा नहीं पाए. ऐसे में हो सकता है कि सरकार कुछ बदलाव कर इन कानूनों को वापस लाने का काम करे.

सरकार की क्या रणनीति?

अब उस सर्वदलीय बैठक में कुल 31 पार्टियों ने हिस्सा लिया था. लेकिन हर साल इस बैठक का हिस्सा बनने वाले पीएम मोदी इस बार वहां मौजूद नहीं रहे. इस बात पर मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा आपत्ति भी जता दी गई. लेकिन सरकार के मुताबिक कुछ महत्वपूर्ण काम की वजह से पीएम बैठक में नहीं आ पाए. लेकिन केंद्र की तरफ से आश्वासन दे दिया गया है कि हर उस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी जिसको चेयरमैन और स्पीकर की स्वीकृति रहेगी.

विपक्षी एकजुटता कितनी मजबूत?

लेकिन इस आश्वासन के बावजूद भी आम आदमी पार्टी की तरफ से सर्वदलीय बैठक को बीच में छोड़ दिया गया. आप नेता संजय सिंह ने आरोप लगाया कि उन्हें बोलने का मौका नहीं दिया गया. वे एमएसपी कानून और बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को बढ़ाने जैसे मुद्दों पर अपने विचार रखना चाहते थे. इस सब के अलावा ममता की तरफ टीएमसी की तरफ से भी विपक्षी एकजुटता को कमजोर किया गया है. कहा जा रहा है कि आज होने जा रही विपक्ष की बैठक में टीएमसी हिस्सा नहीं लेने वाली है.

शीतकालीन सत्र की बात करें तो ये आज से 23 दिसंबर तक चलने वाला है. इस दौरान सदन में सरकार द्वारा कुल 26 बिल पेश किए जाएंगे.

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