छोटे कारोबारियों सहित उद्योग जगत को सरकार से फौरी राहत, टैक्स रिफंड जल्द दिलाने के लिए आज से शुरू किया विशेष अभियान

टैक्स रिफंड और ड्यूटी ड्रॉबैक क्लेम का निपटारा प्राथमिकता आधार पर कराने की कवायदविशेष अभियान में रिफंड और ड्रॉबैक के लिए 14 मई तक किए गए दावों पर होगा विचार


सरकार ने उद्योग जगत, खासतौर पर छोटे कारोबारियों यानी MSME को राहत देने के लिए उनके टैक्स रिफंड और ड्यूटी ड्रॉबैक क्लेम का निपटारा प्राथमिकता आधार पर कराने की कवायद शुरू की है।

इस काम को अंजाम दिलाने के लिए सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (CBIC) 15 से 31 मई तक विशेष अभियान चला रहा है। बोर्ड का यह कदम कोविड से जूझ रहे खास तौर पर छोटे कारोबार यानी MSME को फौरी तौर पर बड़ी राहत दिलाएगा।

14 मई तक के दावों की प्रोसेसिंग और उनका निपटान प्राथमिकता आधार पर

बोर्ड ने कस्टम्स और सेंट्रल टैक्स डिपार्टमेंट की सभी फील्ड यूनिट से रिफंड और ड्रॉबैक के लिए 14 मई तक किए गए दावों की प्रोसेसिंग और उनका निपटान प्राथमिकता आधार पर करने के लिए कहा है। बोर्ड की तरफ से यह निर्देश 13 मई को जारी किया गया था।

बोर्ड ने फील्ड यूनिटों को जारी निर्देश में कहा है कि फिलहाल कारोबारियों, खासतौर पर MSME के पेंडिंग रिफंड और ड्यूटी ड्रॉबैक के क्लेम को समय पर भुगतान करने पर फोकस करने की जरूरत है। इससे मुश्किल भरे मौजूदा हालात में उनको फौरी तौर पर राहत मिलेगी।

CBIC ने कोविड-19 की पहली लहर के दौरान इंडस्ट्री को नकदी की कमी नहीं होने देने के लिए इसी तरह का एक विशेष अभियान चलाया था।

अहम ट्रेड और इंडस्ट्री एसोसिएशनों के साथ तालमेल बैठाकर काम किया जाएगा

बोर्ड ने अपने निर्देशों में कहा है कि इस विशेष अभियान को अंजाम देने के लिए बड़े ट्रेड और इंडस्ट्री एसोसिएशनों, खासतौर पर निर्यातकों के साथ तालमेल बैठाकर काम किया जाएगा। उसका कहना है कि इससे आवेदकों को रिफंड और ड्यूटी ड्रॉबैक क्लेम पाने के लिए जरूरी दस्तावेज मुहैया कराने में मदद मिलेगी।

निर्यातकों से सभी पत्राचार यानी कम्युनिकेशन ईमेल से किया जाएगा

जिन निर्यातकों के ईमेल बोर्ड के पास मौजूद हैं, उनकी मदद के लिए सभी पत्राचार यानी कम्युनिकेशन ईमेल से किया जाएगा। बोर्ड ने यह भी कहा है कि रिफंड क्लेम के जिन मामलों में डेफिसिएंसी मेमो जारी किए गए हैं, उनकी समीक्षा की जाएगी और उनकी मेरिट के आधार पर रिफंड या ड्रॉबैक के भुगतान पर विचार किया जाएगा।

GST के लंबित दावों के क्लीयरेंस के लिए भी अभियान चलाने पर जोर दे रहे विशेषज्ञ

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार की तरफ से यह विशेष अभियान चलाए जाने से इंडस्ट्री को सचमुच मदद मिलेगी। उन्होंने गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) सिस्टम के तहत लंबित दावों के क्लीयरेंस के लिए भी ऐसा अभियान चलाने की जरूरत पर जोर दिया है।

एक्सपोर्ट इनपुट टैक्स क्रेडिट, अतिरिक्त टैक्स पेमेंट का रिफंड क्लेम सेटलमेंट होगा फायदेमंद

AMRG एसोसिएट्स के सीनियर पार्टनर रजत मोहन के मुताबिक, ‘पेंडिंग रिफंड क्लेम की प्रोसेसिंग के लिए GST कमिश्नरेट की तरफ से ऐसी ही व्यवस्था किए जाने से इंडस्ट्री को बहुत फायदा होगा। इस कवायद में एक्सपोर्ट वाले इनपुट टैक्स क्रेडिट के रिफंड, अतिरिक्त टैक्स भुगतान के रिफंड और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर में बनने वाले रिफंड वगैरह को शामिल किया जा सकता है।’

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