किसान संगठनों ने प्रधानमंत्री मोदी को चिट्ठी लिखकर 6 शर्तें रखी, आंदोलन रहेगा जारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 19 नवम्बर को सुबह 9 बजे देश के नाम संबोधन में , देश के किसानों से माफ़ी मांगते हुए तीनों कृषि कानून वापस लेने का ऐलान किया । लेकिन किसान अभी भी सड़कों पर डटे हुए हैं । उनका कहना है कि जब तक ये कानून संसद में रद्द नहीं हो जाता हैं तब तक घर वापसी नहीं होगी । संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रधान मंत्री के नाम एक छिट्टी लिखते हुए ये 6 मांगे रखी हैं । सबसे पहले उन्होंने लिखा हैं । देश के करोड़ों किसानों ने 19 नवम्बर 2021 की सुबह राष्ट्र के नाम आप का संदेश सुना । हमने गौर किया कि 11 राउंड वार्ता के बाद आपने द्विपक्षीय समाधान की बजाए एकतरफा घोषणा का रास्ता चुना लेकिन हमें खुशी है कि आपने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की है हम इस घोषणा का स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि आपकी सरकार इस वचन को जल्द से जल्द और पूरी तरह निभाएगी ।

प्रधानमंत्री जी आप भली-भांति जानते हैं कि तीन काले कानूनों को रद्द करना इस आंदोलन की एकमात्र मांग नहीं है संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार के साथ वार्ता की शुरुआत से ही तीन और मांगे उठाई थी । ये मांगे इस प्रकार हैं ।

1. खेती की संपूर्ण लागत पर आधारित न्यूनतम समर्थन मूल्य को भी कृषि उपज के ऊपर सभी किसानों का कानूनी हक बना दिया जाए ताकि देश के हर किसान को अपनी पूरी फसल पर कम से कम सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी हो सके (स्वयं आप की अध्यक्षता में बनी समिति ने 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री को यह सिफारिश दी थी और आप की सरकार ने संसद में भी इसके बारे में घोषणा भी की थी) ।

2. सरकार द्वारा प्रस्तावित विद्युत अधिनियम संशोधन विधेयक 2020/ 2021 का ड्राफ्ट वापस लिया जाए (वार्ता के दौरान सरकार ने वादा किया था कि इसे वापस लिया जाएगा लेकिन फिर वादाखिलाफी करते हुए इसे संसद की कार्यसूची में शामिल किया गया था।

3. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और इससे जुड़े क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए अधिनियम 2021 में किसानों को सजा देने के प्रावधान हटाया जाए इस साल सरकार ने कुछ किसान विरोधी प्रावधान तो हटा दिए लेकिन सेक्शन 15 के माध्यम से फिर किसान को सजा का गुंजाइश बना दी गई है ।

4. दिल्ली ,हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश और अनेक राज्यों में हजारों किसानों के इस आंदोलन के दौरान सैकड़ों मुकदमों में फंसाया गया है। उनके केशो को तत्काल वापस लिया जाए ।

5. लखीमपुर खीरी हत्याकांड के सूत्रधार और सेक्शन 120 B के अभियुक्त अजय मिश्रा टेनी आज भी खुलेआम घूम रहे हैं और आप के मंत्रिमंडल में मंत्री बने हुए हैं ।वह आपके और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों के साथ मंच भी साझा कर रहे हैं, उन्हें बर्खास्त और गिरफ्तार किया जाए ।

6. इस आंदोलन के दौरान अब तक 700 किसान शहादत दे चुके हैं । उनके परिवारों को मुआवजे और पुनर्वास की व्यवस्था हो । शहीद किसानों के स्मृति में एक स्मारक बनाने के लिए सिंधु बॉर्डर पर जमीन दी जाए ।

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