राजस्थान में रिश्वत कांड में फंसे डीएसपी भंवरलाल खोखर, दो कांस्टेबल भी आए लपेटे में

झुंझुनूं। राजस्थान के झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ में जयपुर देहात एसीबी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए डीएसपी समेत दो कांस्टेबलों को रिश्वत लेते हुए दबोचा है।

एसीबी जयपुर देहात के एएसपी नरोत्तमलाल वर्मा ने बताया कि 10 सितंबर को एक परिवादी ने एसीबी मुख्यालय जयपुर पहुंचकर शिकायत की थी कि उसने फरवरी 2020 में एक दहेज प्रताड़ना का मामला झुंझुनूं जिले के गुढ़ागौड़जी पुलिस थाने में दर्ज करवाया था। इसमें गुढ़ा थाने ने एफआर लगा दी।

इसके बाद उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और वहां से दुबारा जांच के आदेश करवाए। तब यह जांच झुंझुनूं ग्रामीण डीएसपी भंवरलाल खोखर को दी गई। इस मामले में पहले गुढ़ा थाने में तैनात सिपाही और वर्तमान में मुकुंदगढ़ थाने में कार्यरत कांस्टेबल महिपाल निवासी लोयल का परिवादी से संपर्क हुआ और उसने झुंझुनूं एसपी कार्यालय के डीएसबी में कार्यरत कांस्टेबल ओजटू निवासी राजवीरसिंह के जरिए ग्रामीण डीएसपी भंवरलाल खोखर से इस मामले में बातचीत की।

फिर डीएसपी ने मामले में चालान पेश करने और परिवादी की मदद करने के नाम पर दो लाख रुपए मांगे। इस मामले की शिकायत परिवादी ने एसीबी मुख्यालय पर की। एसीबी मुख्यालय ने डीएसपी और दोनों कांस्टेबलों द्वारा रिश्वत की राशि मांगने का सत्यापन किया। वहीं, शुक्रवार को जाल बिछाकर नवलगढ़ में सुनारियां कुएं के पास किराए के मकान में रहने वाले कांस्टेबल महिपालसिंह को एक लाख 55 हजार रुपए की राशि के साथ दबोचा।

वहीं, एसीबी की दो टीमों ने झुंझुनूं में डीएसपी भंवरलाल और कांस्टेबल राजवीर पर नजर रखी हुई थी। नवलगढ़ में कार्रवाई होने के साथ ही दोनों टीमों ने एक साथ डीएसपी व कांस्टेबल राजवीर को पकड़ा और लेकर नवलगढ़ पहुंच गए। तीनों को आमने-सामने बैठाकर मामले की जानकारी ली। आरोपियों को शनिवार को जयपुर स्थित एसीबी के विशेष न्यायालय में पेश किया जाएगा।

कार्रवाई से पहले ही एसीबी को इस बात का अंदाजा था कि तीनों आरोपी एक साथ नहीं मिलेंगे। इसलिए झुंझुनूं एसीबी को बिना कोई सूचना दिए तीन अलग-अलग टीमों ने मोर्चा संभाला। एक टीम नवलगढ़ ठहरी तो दो टीमों ने झुंझुनूं में नजर बनाए रखी। इन टीमों ने एएसपी नरोत्तम लाल वर्मा के नेतृत्व में काम किया। जिनमें डीएसपी सचिन शर्मा व संजयकुमार के अलावा दो इंस्पेक्टर नीरज भारद्वाज व मानवेंद्रसिंह शामिल थे।

हाईकोर्ट से आदेश करवाने के बाद इसी साल अप्रेल माह में डीएसपी ग्रामीण के पास यह फाइल आ गई थी। जिसमें जांच करने की बजाय पहले तो फाइल को लटकाया गया। इसके बाद इस फाइल को लेकर मोलभाव शुरू हो गया। दो लाख रूपए देने पर चालान पेश करने और मदद करने की बात कही गई। जिससे परेशान और दुखी होकर परिवादी एसीबी मुख्यालय पहुंच गया।

एसीबी सूत्रों के मुताबिक ट्रेप की कार्रवाई के बाद एसीबी की अलग-अलग टीमों भी सक्रिय किया गया। वहीं तीनों के घरों में भी सर्च हुआ। लेकिन एसीबी को कुछ खास हाथ नहीं लगा।

मुकुंदगढ़ थाने में कार्यरत कांस्टेबल महिपाल आज ड्यूटी पर था। लेकिन वह दोपहर में रिश्वत की राशि लेने के लिए थाने से अपने किराए के मकान में नवलगढ़ पहुंचा। जहां पर उसने परिवादी से 1.55 लाख रुपए की राशि ली। वहीं एसीबी ने उसे दबोच लिया। एएसपी नरोत्तमलाल वर्मा ने बताया कि सत्यापन के दौरान डीएसपी और दूसरे कांस्टेबल द्वारा पैसे मांगने के उनके पास पुख्ता सबूत है। वहीं तीनों को जब आमने-सामने बैठाया गया तो तीनों की मिलीभगत भी साबित हुई है।

error: Content is protected !!