Ujjwala Scheme Failed; सिलेंडर हो गया हद से ज्यादा महंगा, चूल्हे पर खाना बना रहे लोग

झांसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना उज्ज्वला जिले के लाभार्थियों पर बोझ बन गई है। हालात यह हैं कि एक बार सिलिंडर लेने के बाद बड़ी संख्या में महिलाओं ने दोबारा सिलिंडर रिफिल ही नहीं कराया।

आलम यह हो चला है कि गांवों में फिर से चूल्हे जलने लगे हैं। खाना बनाने के लिए फिर से लकड़ी बीनने और चूल्हा फूंकने की जद्दोजेहद शुरू हो गई है।

केंद्र सरकार की उज्ज्वला योजना के तहत जिले में करीब 1.85 लाख लाभार्थियों को गैस सिलिंडर और चूल्हा दिया गया था। गांव-गांव व्यापक अभियान चलाकर इसके लिए लाभार्थियों का चिन्हांकन किया गया। योजना के पीछे उद्देश्य था कि गांवों और निमभन वर्ग के परिवारों में लकड़ी के चूल्हे पर बनने वाले धुएं से महिलाओं को तमाम बीमारियां होती हैं। वे दूर होेंगीं। साथ ही हर घर तक रसोई गैस पहुंच सकेगी।

योजना शुरू हुई, तो सिलिंडर का दाम 445 रुपये के आसपास था। सरकार की ओर से एक सिलिंडर मिलने के बाद दूसरा सिलिंडर परिवारों को खुद रिफिल कराना था। मगर जिले में करीब 50 हजार लाभार्थियों ने दोबारा सिलिंडर ही नहीं भरवाया। बीते कुछ वक्त से सिलिंडर के दाम एक हजार रुपये के आसपास हैं और सब्सिडी भी कम हो गई है। ऐेसे में तमाम परिवारों में चूल्हे पर ही खाना पक रहा है। सुबह से ही महिलाएं खाना पकाने के लिए लकड़ी का इंतजाम करने निकल पड़ती हैं। जबकि योजना के तहत मिला सिलिंडर और चूल्हा शोपीस बन गया है। जिले के मऊरानीपुर, गुरसराय, बंगरा, खिलारा, बरुआसागर, ककरबई, गरौठा, मोंठ, एरच, रानीपुर, कटेरा क्षेत्र के तमाम गांवों में महिलाएं चूल्हे पर भोजन पकाती हैं।

तमाम परिवारों को चूल्हे का ही भोजन पसंद
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार ऐसे हैं, जहां चूल्हे का ही भोजन पसंद किया जाता है। इसके अलावा गांवों में सिलिंडर पहुंचने की दिक्कत, आग लगने का डर समेत तमाम समस्याओं के चलते भी लाभार्थियों ने सिलिंडर नहीं भरवाए।

लॉकडाउन में दिए गए मुफ्त सिलिंडर
कोरोना संक्रमण को लेकर पिछले साल लगाए गए लॉकडाउन के दौरान गरीब परिवारों को फ्री सिलिंडर देने की सरकार ने व्यवस्था की थी। इस दौरान हर उज्ज्वला लाभार्थी को तीन महीने तक मुफ्त सिलिंडर दिए गए। इस दौरान जिले में करीब 1.84 लाख लाभार्थियों ने सिलिंडर रिफिल करवाया। योजना बंद होने के बाद सिलिंडर रिफिल नहीं कराया गया।

जिले में हुआ था फर्जीवाड़ा
जिले में उज्ज्वला योजना में शुरुआत में ही बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ था। एक गैस एजेंसी ने जिले में लाभार्थियों को योजना का लाभ देने के लिए वसूली की और फर्जी लाभार्थी शामिल कर दिए गए। इसकी विजिलेंस जांच भी हुई। मामले में अब तक कार्रवाई नहीं हुई है।

कहते हैं लाभार्थी
गैस सिलिंडर के दाम बढ़ गए हैं। लॉकडाउन में तो सिलिंडर मिला था। अब इतनी आय नहीं है कि हर महीने एक हजार रुपये खर्च कर सकें। – रीना कुशवाहा, बरुआमाफ

सिलिंडर के दाम आसमान छू रहे हैं। चूल्हे पर ही खाना पकाते हैं। सुबह से लकड़ी बीनने निकल जाते हैं। सिलिंडर का खर्च बढ़ गया है।- रामकुंवर कुशवाहा, खिलारा

गैस सिलिंडर जब मिला था, तो बेहद सस्ता था। कुछ महीने तक तो लिया। बाद में सब्सिडी कम हो गई। सिलिंडर महंगा हो गया। – सोनम राजा बुंदेला, हरपुरा

सिलिंडर के बढ़ते दाम के चलते खरीद नहीं कर रहे हैं। चूल्हे पर ही खाना बनाते हैं। घर में सबको चूल्हे का खाना ही पसंद है।- सुमित्रा देवी अहिवार, क दौरा

धुआं तो परेशान करता है, लेकिन अब आदत हो गई है। सिलिंडर इतना महंगा है कि खरीद नहीं सकते। गांव तक सिलिंडर नहीं पहुंच पाता।- संजौ कुशवाहा, बरुआमाफ

जिले में 1.86 लाख परिवारों को उज्ज्वला योजना का लाभ दिया गया था। लॉकडाउन में भी मुफ्त सिलिंडर मुहैया कराए गए। लाभार्थियों को सिलिंडर रिफिल कराने के लिए जागरूक किया जाता है।
तीर्थराज यादव, डीएसओ

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