अमृतसर में बने दिल्ली जैसे हालातः श्मशानघाट में जगह न मिलने पर जमीन पर हो रहे संस्कार

कोरोना महमारी में बढ़ रहे पॉजिटिव केसों ने दिल्ली से अमृतसर में भी हालात बना दिए है। श्मशानघाट में अब शवों के अंतिम संस्कार के लिए जगह नहीं मिल रही है। शहर के सबसे बड़े हाथी गेट के सामने श्मशानघाट में 3 शवों का बिना थड़े के जमीन पर ही संस्कार किया गया। परिजनों में रोष पाया जा रहा है तथा प्रतिदिन श्मशानघाट में शवों के अंतिम संस्कार की संख्या बढ़ती जा रही है।जानकारी के अनुसार हाथी गेट के बाहर अमृतसर के सबसे बड़े शिवपुरी धाम में 56 थड़ों का निर्माण करवाया गया है। प्रतिदिन औसतन 30 शवों का संस्कार यहां किया जा रहा है। इनमें कोरोना संक्रमित मृतकों के शवों की संख्या प्रतिदिन औसतन 8 से 10 है। एक शव के संस्कार के बाद राख ठंडी होने में कम से कम 2 दिन का वक्त लगता है। इस दौरान किसी अन्य शव का संस्कार इस थड़े पर नहीं किया जा सकता। बुधवार को जलती हुई चिताओं व ठंडी हो रही चिताओं के बीच तीन शवों को लाया गया, थड़ों पर जगह नहीं थी। ऐसे में अंतिम संस्कार की रस्में जमीन पर ही की गई। इनमें 2 कोरोना संक्रमितों के शव थे, जबकि एक अन्य। बुधवार को शिवपुरी में 31 शवों का संस्कार किया गया। इनमें से 6 कोरोना संक्रमितों के शव थे, जबकि 25 अन्य है। अमृतसर में हालात यह पैदा हो रहे है कि शिवपुरी में शवों की संख्या बढ़ रही है व संस्कार के लिए लोगों को इंतजार करना पड़ रहा है।

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