किताबें नही मिलने से मजदूरी करने पर मजबूर बच्चे और अब होगी कार्यवाही; बिहार

देश में बच्चों की पढ़ाई लिखाई की स्थिति पहले ही बेहद खराब है। वही बिहार में अब शिक्षा विभाग में एक और घोटाला सामने आया है। पढ़ाई लिखाई के लिए किताबें बेहद जरूरी होती है। अगर बच्चों को किताबें ना मिले तो देश का भविष्य कैसे बनेगा। बिहार सरकार सभी बच्चों को किताबों के लिए पैसा उनके एकाउंट में देती है। बिहार सरकार 1 से 5 कक्षा तक 250 रुपये और 6 से 8 तक 400 रुपये किताबों के लिए देती है। इस साल बिहार के 24 जिलों में ही किताबों का पैसा आया और 27 जिलों में किताबों का शिवर लगा ही नही। किताबें नही मिली तो कई बच्चे मजबूरी में फल और सब्जियां बेच रहे है।

आज कोरोना लॉक डाउन के लगभग 9 महीने बाद स्कूल बंद है, सरकार दूरदर्शन और ऑनलाइन पढ़ाई के दावे कर रही है लेकिन बिहार में बच्चों के पास पढ़ने के लिए किताबें ही नही है। मुजफ्फरनगर, बेसुगराय, नालंदा और शेखपुरा के अलावा कहीं कोई शिवर नही लगा जिससे बच्चों को किताबें मिली ही नही।

इस लॉकडाउन में कई बच्चों के माता-पिता के नौकरी जा चुकी है। जिसके कारण कई बच्चों को पढ़ाई छोड़कर कमाई करनी पड़ रही है। लेकिन स्कूल बंद होने के बाद कितने बच्चे मजदूरी कर रहे है या कूड़ा तक बीन रहे हैं इसका आंकड़ा भले ही शिक्षा के विभाग के पास न हो, पर कई जिलों से ऐसी तस्वीर देखने को मिली हैं।

इस संबंध शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने कहा, बच्चों के खाते में किताब की राशि भेज दी गई है, 55 प्रकाशकों को कक्षा 1 से 8 तक के लिए निर्धारित पाठ्य पुस्तक छापकर जिलों में भेजने की जिम्मेदारी दी गई थी। अगर बच्चों को किताबें नहीं मिली है तो इसके लिए दोषियों को पकड़कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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