सरकारी आंकड़ों में 8.5 करोड़ डोज हर महीने बन रही, पर मई के 3 हफ्तों तक केवल 3.6 करोड़ दी गईं


देश में वैक्सीन का गणित उलझता जा रहा है। सरकारी आंकड़ों में वैक्सीन की संख्या पर्याप्त बताई जा रही है, लेकिन इनका आवंटन काफी कम है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में बताया कि करीब 8.5 करोड़ वैक्सीन डोज हर महीने बनाई जा रही है, लेकिन मई के शुरुआती तीन हफ्तों में केवल 3.6 करोड़ वैक्सीन ही दी गई हैं।

इन सवालों के जवाबों से समझिए वैक्सीनेशन का गणित
1. अभी देश में वैक्सीन प्रोडक्शन के आंकड़े क्या हैं?

  • सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया- सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया कोविशील्ड की 6.5 करोड़ डोज हर महीने बना रहा है। सीरम ने भी इसकी पुष्टि की।
  • भारत बायोटेक कोवैक्सिन की 2 करोड़ डोज इतने ही समय में बना रहा है। कंपनी के सीएमडी कृष्णा एल्ला के बयान भी इन आंकड़ों को सही बताते हैं।
  • कोवैक्सिन का प्रोडक्शन जुलाई के आखिर तक 2 करोड़ से बढ़ाकर 5.5 करोड़ तक कर दिया जाएगा। कृष्णा एल्ला ने कहा था कि मई तक ही प्रोडक्शन 3 करोड़/महीना हो जाएगा।
  • स्पुतनिक की अभी 30 लाख डोज हर महीने बन रही है और जुलाई अंत तक इसका प्रोडक्शन भी 1.2 करोड़ तक पहुंच जाएगा।

2. प्रोडक्शन के हिसाब से कितनी वैक्सीन मई में दी गई?

  • जो आंकड़े सरकार ने गिनाए हैं, उनसे हिसाब लगाया जाए तो मई में केवल कोविशील्ड-कोवैक्सीन की कम से कम 8.5 करोड़ डोज बनी हैं। यानी 31 दिनों के लिए हर दिन 27.4 लाख डोज।
  • अब कोविन पोर्टल पर वैक्सीन के आंकड़े देखें तो 22 मई तक 3.6 करोड़ से कम ही डोज देश में दी गई हैं यानी 16.2 लाख डोज हर दिन। इसी रफ्तार से वैक्सीनेशन चला तो महीना पूरा होते-होते 5 करोड़ डोज देश में दी जाएंगी।
  • अब पिछले 7 दिनों की बात करें तो आंकड़े तेजी से गिरे हैं। 16.2 लाख डोज से ये हर दिन 13 लाख से कम डोज पर आ गए हैं।
  • अगर मई में 5 करोड़ डोज भी दे दी जाती हैं तो सवाल उठता है कि जब 8.5 करोड़ डोज बनाई जा रही हैं तो फिर असल वैक्सीनेशन में कमी क्यों? वो भी तब जब राज्य लगातार वैक्सीन की कमी की शिकायत कर रहे हैं?

3. वैक्सीनेशन का गणित उलझा क्यों?
प्रोडक्शन के हिसाब के डोज दिए जाने का गणित उलझने की एक वजह समझ में आ रही है, वो है प्राइवेट सेक्टर्स का कोटा। इस सेक्टर को वैक्सीन डील न हो पाने की वजह से या फिर किसी अन्य वजह से नहीं मिल पाई हैं। हालांकि, ये कारण भी इतने बड़े गैप को एक्सप्लेन नहीं कर पा रहा है।

4. प्रोडक्शन के हिसाब से वैक्सीनेशन न होने का असर?
कर्नाटक ने रविवार को 18-44 तक के एजग्रुप का वैक्सीनेशन रोक दिया। 12 मई को महाराष्ट्र ने भी यही कदम उठाया था। 22 मई को आंध्र ने प्रधानमंत्री को खत लिखा कि प्राइवेट अस्पतालों को वैक्सीन की सप्लाई रोक दी जाए। आंध्र ने कहा था कि अस्पताल मनमानी कीमत वसूल रहे हैं। कोविन ऐप या पोर्टल पर भी वैक्सीनेशन के लिए स्लॉट मिल नहीं रहे हैं।

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