बीडीओ ने महिला को कहे जातिसूचक शब्द, मुख्यमंत्री संकल्प सेवा में शिकायत करने पर दर्ज हुई FIR

जाति आधारित अत्याचार के विरूद्ध धरना

हिमाचल में आम आदमी तो छोड़ो अब प्रशासनिक अधिकारी भी अनुसूचित जाति के लोगों को प्रताड़ित करने लगे है। सबसे बड़ी शर्म की बात यह है कि ऐसे मामलों में पुलिस समय पर कार्यवाही नही करती। पुलिस ज्यादातर मामलों को दबाने का काम कर रही है। लोग प्रताड़ित होने पर पुलिस या प्रशासनिक अधिकारी के पास शिकायत लेकर जाते है और पुलिस सुप्रीम कोर्ट और अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों को दरकिनार करते हुए अत्याचार के केसों को दबाने में लग जाते है। जिसके चलते प्रदेश में अनुसूचित जाति के लोगों पर अत्याचार हर दिन बढ़ते जा रहे है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश है कि तत्काल प्रभाव से प्राथमिकी दर्ज होगी और एससी एसटी एक्ट की धारा 18 A के तहत तत्काल गिरफ्तारी का प्रावधान है। लेकिन पुलिस ने तो तत्काल प्राथमिकी दर्ज करती है और ना ही तत्काल अपराधी को गिरफ्तार करती है। बल्कि अपराधी को बचाव का पूरा मौका देती है।

ऐसा ही ताजा मामला आज करसोग में सामने आया है, जानकारी के मुताबिक विकास खंड अधिकारी करसोग ने यहां एक अनुसूचित जाति की महिला को जातिसूचक शब्द कहे। जब महिला ने थाने में जाकर एफआईआर दर्ज करवानी चाही तो पुलिस अधिकारियों ने महिला को कहा की गवाह लेकर आओ तब प्राथमिकी दर्ज होगी। जोकि पुलिस की अनुसूचित जाति के लोगों और कानून के प्रति गैर जिमेदारना हरकत को दिखाता है।

विकास खंड अधिकारी द्वारा प्रताड़ित महिला

जानकारी के मुताबिक पीड़ित महिला ने मुख्यमंत्री संकल्प सेवा में फ़ोन करके शिकायत दर्ज करवाई। उसके बाद पुलिस हरकत में आई और तब जाकर विकास खंड अधिकारी भुवनेश चढ्ढा के खिलाफ अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम में प्राथमिकी दर्ज की गई। पीड़ित महिला ने अपनी शिकयत में कहा है कि वह कूड़ा इक्कठा करने का काम करती है और आज वह विकास खंड अधिकारी के आवास पर कूड़ा लेने गई थी। जहां विकास खंड अधिकारी भुवनेश चढ्ढा ने उसको जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया।

मुख्यमंत्री को भेजा गया शिकयत पत्र

इस मामले में करसोग में अनुसूचित जाति के लोगों ने आज धरना दिया तथा विकास खंड अधिकारी के तबादले की मांग की। उनका कहना है कि अगर विकास खंड अधिकारी यहां रहेगा तो वह जांच को प्रभावित करेगा। जिसके चलते उनको न्याय नही मिलेगा। इसलिए विकास खंड अधिकारी को यहां से हटाया जाए तथा निलंबित किया जाए ताकि उनको न्याय मिल सके। इस मामले में सभी लोगों में मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश को शिकायत पत्र भी भेजा है।

जब हमने इस मामले में पुलिस स्टेशन करसोग में फ़ोन करके जानकारी लेनी चाही। तो पुलिस अधिकारी का कहना था कि यह पिछले कल का मुकदमा है अब क्या खबर छापोगे। उन्होंने बिना कोई जानकारी दिए कॉल डिसकनेक्ट कर दी।

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