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आजादी का अमृत महोत्सव: पढ़ाई छोड़ देश के हजारों युवा कूद पड़े थे आजादी के आंदोलन में, अंग्रेजों के मुकाबले के लिए बनाई थी वानर सेना

अपनी आंखों में आजादी का सपना लिए तमाम क्रांतिकारियों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी थी, लेकिन अपने बलिदान के साथ वे इंकलाब की आवाज को इतना मजबूत कर गए थे कि जल्दी ही अंग्रेजी सरकार की जड़ें हिल गईं.

बच्चों ओर युवाओं ने भी इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था तमाम छात्र कॉलेज छोड़ धरना-प्रदर्शनों में भाग लेने लगे थे तो बच्चों का एक बाल भारत संगठन भी बनाया गया था जो क्रांतिकारियों की गुप्त सूचनाएं इधर से उधर पहुंचाते थे, इन्हें वानर सेना भी कहा जाता था. Tv9 की इस खास सीरीज में आज हम आपको क्रांति की उसी गाथा से रूबरू कराने जा रहे हैं.

आंखों में था बस आजादी का सपना

देश के आजादी ही वो सपना था जो युवाओं की आंखों में घर कर गया था, स्वतंत्रता आंदोलन से बड़ी कोई परीक्षा नहीं रह गई थी, ऐसे में छात्र किताब और कक्षाओं को छोड़कर मां भारती की वंदना में समर्पित हो गए थे. ये धरना प्रदर्शन भी करते थे और गली-मोहल्लों में जुलूस भी निकालते थे ताकि लोग जागरूक हों, और स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़ें

वीरांगना माता पार्वती करती थीं जागरूक

आगरा की वीरांगना माता पार्वती छात्रों को जागरूक करती थीं, देखते ही देखते 150 स्वयंसेवक इसके लिए तैयार हो गए थे और उन्होंने खुद कॉलेजों के छात्रों को जागरूक करने का निश्चय किया. प्रधानाचार्यों ने इससे इन्कार कर दिया तो छात्र धरने पर बैठ गए इसके बाद प्रधानाचार्यों ने बात मान ली. कॉलेज विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने और कॉलेज छोड़ने के नारे लगाए जाने का सिलसिला शुरू हो गया.

खादी पहनने की मिली छूट

ये वो दौर था जब छात्रों को स्कूल कॉलेज में खादी नहीं पहनने दी जाती थी और न ही स्कूलों में झंडा फहराने दिया जाता था, छात्रों ने इसके लिए भी विद्रोह किया तो प्रधानाचार्यों को ये बात भी माननी पड़ी और उन्होंने छात्रों को खादी पहनने और जुलूस में शामिल होने और झंडा फहराने की अनुमति दे दी थी.

सेंट जोंस कॉलेज बंद कराने के लिए फोड़ा गया बम

आजादी के आंदोलन में आगरा के कॉलेजों का बड़ा योगदान है, इनमें आगरा कॉलेज, बलवंत राजपूत हाईस्कूल का नाम आगे हैं, सेंट जोंस कॉलेज ऐसा था जिस पर अंग्रेजों का ज्यादा वर्चस्व था, इसीलिए इस कॉलेज के छात्र आजादी के आंदोलनों में नाम मात्र ही भाग लेते थे, ऐसे में क्रांतिकारी छात्रों ने सेंट जोंस कॉलेज को बंद कराने के लिए यहां दो बम विस्फोट किए थे, इसके बाद कॉलेज बंद हो गया था, क्रांतिकारी युवाओं ने हॉस्टल के स्टोर रूम में भी आग लगा दी थी.

वानर सेना ने कर दी थी अंग्रेजों की नाक में दम

अंग्रेजों के खिलाफ किशोरों का जुनून भी सिर चढ़कर बोल रहा था, ऐसे ही किशोरों ने मिलकर बाल भारत सभा का गठन किया था, जिसे वानर सेना कहते थे, इस वानर सेना ने अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया था, क्रांतिकारियों के लिए गुप्त सूचना लाना, एक जगह से दूसरी जगह तक गुप्त सूचनाएं पहुंचाना ही इनका काम था.

राशन का इंतजाम करती थी सेना

यही वानर सेना राशन का इंतजाम भी करती थी, सत्याग्रह छावनी यानी की बाग मुजफ्फर खां, नमक की मंडी में रहने वाले क्रांतिकारियों के लिए यही राशन का इंतजाम करते थे, आगरा के साथ ही शहर के आसपास की तहसीलों में भी इनका वर्चस्व था, बिचपुरी, मिढ़ाकुर, दहतोरा आदि स्थानों पर भी वानर सेना का अच्छा खासा दबदबा था, किशोर और छोटी उम्र के बालक होने की वजह से अंग्रेजों को इन पर शक भी नहीं होता था.

थानेदार को दे दी थी चेतावनी

क्रांतिकारी मनोहर लाल शर्मा की पुस्तक भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में आगरा का योगदान में वानर सेना का जिक्र किया गया है. इसमें बताया गया है कि थाना छत्ता के एक थानेदार से सभा से जुड़े एक बालक की किताब छीन ली थी, इसके बाद वानर सेना ने एक दिन के भीतर किताब वापस करने की चेतावनी दी तो थानेदार डर गया और शाम तक बच्चे को बुलाकर किताब लौटा दी. किताब में बताया गया है कि इन नन्हें रणबांकुरों को न तो गिरफ्तारी का डर था और न ही पिटाई का.

प्रभात फेरी पर बरसते थे पुष्प

बाल भारत सभा के सेनानियों की वर्दी, बैज और बिगुल भी होता था, हालांकि वे इसे तभी धारण करते थे जब प्रभात फेरी निकलती थी, जब ये वानर सेना प्रभात फेरी निकालती थी तो सबकी नजरें उन पर टिक जाती थीं, लोग पुष्पवर्षा करते थे. प्रभात फेरी के माध्यम से लोगों को जागरूक करना इनका काम था.

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