90% महिला ब्लैकमेलिंग के दर्ज नही होते; परिचित ही करते है सबसे ज्यादा ब्लैकमेल

दीघा की रहने वाली मीता (काल्पनिक नाम) ने महिला हेल्पलाइन में आवेदन देते हुए अपने एक मित्र की ओर से ब्लैकमेलिंग किये जाने की बात की। हालांकि उसने आवेदन रजिस्टर करने से मना किया और कहा कि माता-पिता को पता चला तो वह परेशानी में आ जायेगी। काउंसेलर और प्रोजेक्ट मैनेजर की ओर से दोनों पक्षों को बुलाकर काउंसेलिंग की गयी। ऐसे न जाने कितने मामले हर दिन महिला हेल्पलाइन में आते हैं, जिसे काउंसेलिंग कर सुलझाया जाता है। इन मामलों में ज्यादातर पहचान वाले शामिल होते हैं। वहीं, कई मामले इस लिए उलझ जाते हैं क्योंकि आवेदिका एफआइआर ही नहीं करना चाहती हैं।

स्कूल और कॉलेजों में पढ़ने वाली छात्राएं कई बार सोशल साइट्स और वाट्सएप के जरिये ब्लैकमेलिंग की शिकार होती हैं। इन्हें ब्लैकमेल करने वाले परिचित और अपरिचित शामिल होते हैं। ऐसे न जाने कितने मामले हर साल महिला हेल्पलाइन में आते हैं, जहां लड़कियां शिकायत तो करती हैं, लेकिन मामला रजिस्टर नहीं कराती है। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में परिवारवाले और समाज उन्हें ही दोषी मानेंगे। उनकी पढ़ाई और बाहर निकलना सब पर पाबंदी लग जायेगी। आखिर ऐसा क्यों हैं कि अभिभावक अपने बेटियों को इन मामलों में समझ नहीं सकते हैं और उन्हें दोषी करार देते हैं।

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