पिता को स्ट्रेचर पर लेकर बेड खोज रहा था 12 साल का शिवम

राजधानी दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर अपने पिता के लिए ऑक्सीजन बेड खोज रहे 12 साल के शिवम को हिन्दुस्तान संवाददाता और यूथ कांग्रेस के एक नेता की मदद से ऑक्सीजन का बेड मिल गया। राम मनोहर लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर 12 साल का शिवम अपनी मां के साथ मिलकर अपने पिता को स्ट्रेचर पर रखकर खींच रहा था तभी हिन्दुस्तान संवाददाता ने देखा कि छोटा बच्चा रोते हुए अपने पिता के लिए ऑक्सीजन बेड की गुहार लगा रहा है।

शिवम दिल्ली के अलीपुर इलाके में रहता है और उसके पिता मजदूरी करते हैं। मूल रूप से बिहार के रहने वाले इस परिवार में तीन ही सदस्य हैं जो दिल्ली में रहते हैं। इनमें 45 साल का घनश्याम, उसकी पत्नी और 12 साल का बेटा शिवम है। बुधवार दोपहर तीन बजे पिता की सांस न आने की समस्या और तबीयत खराब होने पर उनकी पत्नी उन्हें अस्पताल लेकर आई। यहां पहले वे मेडिसिन विभाग की इमरजेंसी में गए जहां उनके पिता की हालत को देखते हुए उन्हें ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ मुख्य इमरजेंसी में जाने के लिए भेज दिया।

सिलेंडर देने के बदले महिला का फोन रख लिया
शिवम और उसकी मां घनश्याम को स्ट्रेचर पर लेकर मुख्य इमरजेंसी की तरफ जा रहे थे। इमरजेंसी के अंदर डॉक्टर ने उनका ऑक्सीजन का स्तर देखा जो 88 था। डॉक्टर ने कहा कि यहां ऑक्सीजन वाला बेड खाली नहीं है, आप इन्हें किसी और अस्पताल ले जाओ। शिवम की मां इमरजेंसी से बाहर रोते हुए आयी तो हिन्दुस्तान के संवाददाता ने उनसे बात की।

उन्होंने रोते हुए बताया कि यहां बेड नहीं हैं, ऑक्सीजन भी खत्म हो रही है तो हम कहां जाएं। परिवार का दर्द देख संवाददाता ने डॉक्टर से कुछ देर के लिए ऑक्सीजन लगाने का आग्रह किया। डॉक्टर ने बताया कि एक बेड ओर दो मरीज भर्ती हैं और एक भी जगह खाली नहीं हैं। महिला का आरोप है कि ऑक्सीजन सिलेंडर देने के बदले अस्पताल ने उसका फोन रख लिया था। संवाददाता ने डॉक्टर से आग्रह किया कि छोटा बच्चा अपने पिता को स्ट्रेचर पर ले जा रहा है। परिवार के पास सिर्फ 500 रुपये हैं आप कुछ देर के लिए ऑक्सीजन लगा दो तब तक हम कुछ इंतजाम करते हैं।

इसके बाद संवाददाता ने मदद की दरकार वाला ट्वीट किया और कई लोगों को फोन किए। थोड़ी देर में यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवासन का फोन आया कि वे 20 मिनट में ऑक्सीजन लेकर पहुंच रहे हैं। इस दौरान संवाददाता ने एंबुलेंस बुला ली लेकिन उसमें ऑक्सीजन नहीं थी। 25 मिनट बाद श्रीनिवासन अपने साथियों के साथ बड़ा ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर अस्पताल पहुंच गए।

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