कांग्रेस, शिवसेना, टीएमसी, सीपीआई और सीपीआईएम के 12 सदस्य शीतकालीन सत्र से निलंबित

12 Rajya Sabha MPs Suspended: संसद के मौजूदा शीतकालीन सत्र से विपक्षी दलों के 12 सांसदों को निलंबित कर दिया गया है. जिन सदस्यों को निलंबित किया गया है उनमें मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के इलामारम करीम, कांग्रेस की फूलों देवी नेताम, छाया वर्मा, रिपुन बोरा, राजमणि पटेल, सैयद नासिर हुसैन, अखिलेश प्रताप सिंह, तृणमूल कांग्रेस की डोला सेन और शांता छेत्री, शिव सेना की प्रियंका चतुर्वेदी और अनिल देसाई तथा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के विनय विस्वम शामिल हैं.

इन सांसदों को पिछले मॉनसून सत्र के दौरान हुए हंगामे के चलते निलंबित किया गया है. उपसभापति हरिवंश की अनुमति से संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस सिलसिले में एक प्रस्ताव रखा जिसे विपक्षी दलों के हंगामे के बीच सदन ने मंजूरी दे दी. राज्यसभा से निलंबित किए जाने पर शिवसेना की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा है कि हमारा पक्ष जाने बिना कार्रवाई की गई है.

निलंबन पर क्या बोले सांसद?

प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज देखें तो यह पता चल जाएगा कि पुरुष मार्शल महिला सांसदों को पीट रहे हैं. एक तरफ ये सब है और दूसरी तरफ आपका फैसला? यह कैसा असंसदीय व्यवहार है?

वहीं कांग्रेस की सांसद छाया वर्मा ने कहा कि यह निलंबन अनुचित और अन्यायपूर्ण है. अन्य दलों के कई सदस्यों ने भी हंगामा किया था लेकिन अध्यक्ष ने मुझे निलंबित कर दिया. पीएम मोदी जैसा चाहते हैं वैसा ही कर रहे हैं क्योंकि उनके पास भारी बहुमत है.

कांग्रेस सांसद रिपुन बोरा ने कहा कि यह पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है; लोकतंत्र और संविधान की हत्या है. हमें सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया है. यह एकतरफा, पक्षपाती, प्रतिशोधी निर्णय है. विपक्षी दलों से सलाह नहीं ली गई.

संसद के मॉनसून सत्र में राज्यसभा में हंगामे के दौरान धक्का-मुक्की करने और सदन की मर्यादा का कथित तौर पर उल्लंघन करने के आरोपों के बाद राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने इस मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की थी. समिति की सिफारिशों के आधार पर इन सांसदों के खिलाफ आज कार्रवाई की गई. संसद का शीतकालीन सत्र आज से शुरू हुआ है और यह 23 दिसंबर तक प्रस्तावित है.

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