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देश को राम भरोसे छोड़, वैक्सीन का निर्यात करके अपनी छवि सुधार रही मोदी सरकार- रमेश राव

प्रदेश कांग्रेस सचिव रमेश राव ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि आज सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की नाकामियों से पर्दा उठा ही दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने हाथ ली ऑक्सीजन वितरण की व्यवस्था, कोरोना महामारी के दौरान ऑक्सीजन संकट को देखते हुए 12 सदस्यीय टास्क फोर्स का गठन किया। जिसमें मात्र दो सदस्य ही होगे और एक सप्ताह के अंदर ऑक्सीजन वितरण के समस्या का समाधान होगा।
उन्होंने ने कहा अभी तक भारत को 40 से ज्यादा देशों ने मदद आ चुकी है, पर सरकार वितरण करने के बजाय हाथ पर हाथ दरे बैठी रही। रमेश राव ने कहा कि आज पूरे देश में कोविड वैक्सीन की भारी किल्लत चल रही है। लेकिन देशवासियों के लिए वैक्सीन का पर्याप्त स्टॉक जुटाने की बजाए। पहले मोदी सरकार विदेशों में वैक्सीन भेज कर अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि निखारने में लगी रही। जिसका खामियाजा आज देश की जनता भुगत रही है।

केंद्र सरकार द्वारा कोरोना टीकाकरण के लिए स्वीकृत 35,000 करोड़ रुपये के बजट का धीमी गति से उपयोग ऐसे समय में हो रहा है। देशव्यापी टीकाकरण कार्यक्रम पर अभी तक 4,744 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। जोकि मौजूदा वित्त वर्ष में टीकाकरण के लिए आवंटित कुल बजट के 14 फीसदी से भी कम है। रमेश राव ने कहा कि 1 मई से 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के लोगों को वैक्सीन लगाने की बड़े जोर शोर से घोषणा की थी। आज हालात देश की जनता के सामने हैं। आज बड़ी संख्या में नौजवान भी कोरोना संक्रमण की चपेट में आकर अपनी जान गंवा रहे हैं और अस्पतालों में ना ऑक्सीजन मिल पा रही है और ना ही बेड मिल पा रहे हैं। लोग सड़क पर ही दम तोड़ रहे हैं।

कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है और 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के लोग वैक्सीन लेने के लिए दर-दर भटक रहे हैं और सरकार के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है कि ऐसे लाखों लोगों को वैक्सीन कब लगेगी। सरकार को देश के सभी राज्य के सभी छोटे से बड़े स्वास्थ्य संस्थानों में वैक्सीन का स्टॉक उपलब्ध करवाकर युद्ध स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के नेतृत्व की फजीहत हो रही है। रिसर्च जरनल की रिपोर्ट लैंसेट ने भी कहा कि मोदी सरकार के काम माफी लायक भी नहीं और उन्हें कोरोना के प्रति अपनी जिम्मेदारी लेनी चाहिए और सही आंकड़ों को देश और विश्व के सामने रखना चाहिए था। अगर इसी तरह आंकड़ें छुपाते रहे तो आने वाले दिनों भारत को बहुत नुक्सान उठाना पड़ेगा।

सरकार को आज के समय में 20 हजार करोड़ की लागत से बन रहे प्रधानमंत्री आवास ग्रांड विस्टा नई संसद जैसे प्रोजेक्ट को विराम देकर जनता की सेवा में उस बजट का प्रयोग किया जाए।

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