New Delhi News: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ी खुशखबरी दी है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की विकास दर 7.4 प्रतिशत तक पहुँचने का अनुमान है। पीएम मोदी ने बुधवार को इसे ‘सुधार एक्सप्रेस’ की रफ्तार बताया। उन्होंने साफ कहा कि यह एनडीए सरकार की निवेश नीतियों का असर है। सरकार के प्रयासों से भारत अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। पीएम ने इसे देश के उज्ज्वल भविष्य का संकेत माना है।
जीडीपी के नए आंकड़ों ने सबको चौंकाया
सांख्यिकी मंत्रालय ने हाल ही में पहले अग्रिम अनुमान जारी किए हैं। इसके मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में जीडीपी ग्रोथ 7.3 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। यह आंकड़ा काफी उत्साहजनक है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी 7.3 प्रतिशत का अनुमान लगाया था। वहीं, सरकार का शुरुआती अनुमान 6.3 से 6.8 प्रतिशत के बीच था। नए आंकड़े इन सभी अनुमानों से बेहतर हैं। यह दर्शाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था उम्मीद से ज्यादा तेजी से दौड़ रही है।
क्या है मोदी की ‘सुधार एक्सप्रेस’?
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर भारत की तुलना ‘सुधार एक्सप्रेस’ से की। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे में सुधार हो रहा है। हम विनिर्माण को बढ़ावा दे रहे हैं। डिजिटल क्षेत्र में भी भारत कमाल कर रहा है। सरकार का लक्ष्य ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ाना है। पीएम ने कहा कि हम एक समृद्ध भारत का सपना साकार कर रहे हैं। दुनिया भर में भारत के अगली पीढ़ी के सुधारों की तारीफ हो रही है। हमारे लोगों का नवाचार वैश्विक ध्यान खींच रहा है।
युवा शक्ति बनी प्रगति का इंजन
प्रधानमंत्री ने देश की युवा पीढ़ी पर भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि भारत की जनसंख्या और युवाओं का साहस ही इस ‘सुधार एक्सप्रेस’ का असली इंजन है। सुधारों का असली मकसद आम नागरिक का जीवन बेहतर बनाना है। सरकार चाहती है कि उद्यमी पूरे आत्मविश्वास के साथ काम करें। संस्थानों को भी स्पष्टता और भरोसे के साथ काम करना चाहिए। यह सब मिलकर देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
जीएसटी और निवेश से मिली राहत
पीएम मोदी ने अपनी सरकार के कुछ बड़े फैसलों को भी याद किया। उन्होंने बीमा कंपनियों में 100 प्रतिशत एफडीआई (FDI) की मंजूरी का जिक्र किया। इसके अलावा जीएसटी को लेकर भी बात की। उन्होंने बताया कि जीएसटी में 5 और 18 प्रतिशत के स्लैब लागू किए गए हैं। इससे मध्यम वर्ग के परिवारों और छोटे व्यापारियों को बड़ी राहत मिली है। किसानों और लघु उद्योगों पर भी बोझ कम हुआ है। ये नीतियां मांग और निवेश दोनों को बढ़ा रही हैं।
