New Delhi News: महंगाई की आग में जल रहे बांग्लादेश को भारत ने बड़ी राहत दी है। भारत अपने पड़ोसी देश को दो लाख टन उष्णा चावल निर्यात करेगा। इस फैसले से वहां की जनता को सस्ती दरों पर अनाज मिल सकेगा। भारतीय चावल मिल संचालकों और निर्यातकों ने इस कदम का स्वागत किया है। इससे पूर्वी और दक्षिणी भारत के व्यापारियों के लिए कमाई के नए रास्ते खुल गए हैं।
232 निजी कंपनियों को मिली जिम्मेदारी
बांग्लादेश सरकार ने चावल आयात के लिए 232 निजी कंपनियों को चुना है। ये कंपनियां 10 मार्च 2026 तक चावल भेज सकेंगी। वहां बाढ़ के कारण फसलों को भारी नुकसान पहुंचा था। इसके चलते चावल की कीमतें आसमान छू रही हैं। भारत से आयात होने पर वहां के बाजारों में दाम स्थिर हो जाएंगे। यह आयात उस पुरानी योजना से अलग है, जिसमें 9 लाख टन चावल मंगाने की बात कही गई थी।
इन दो राज्यों को होगा सबसे ज्यादा फायदा
भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (IREF) ने इस फैसले को अहम बताया है। अध्यक्ष प्रेम गर्ग के मुताबिक, बांग्लादेश भारत का पुराना खरीदार है। इसका सीधा फायदा पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश के व्यापारियों को मिलेगा। ये राज्य बांग्लादेश के करीब हैं, जिससे ट्रांसपोर्ट का खर्च कम आता है। भारतीय चावल की कीमतें भी काफी प्रतिस्पर्धी हैं, जो बांग्लादेशी आयातकों को आकर्षित करती हैं।
पाकिस्तान से काफी सस्ता है भारतीय चावल
निर्यातकों के आंकड़ों के मुताबिक, भारत इस समय बांग्लादेश के लिए सबसे किफायती सप्लायर है। भारतीय सफेद चावल की कीमत 351 से 360 डॉलर प्रति टन के बीच है। वहीं, पाकिस्तान यही चावल करीब 395 डॉलर प्रति टन में ऑफर कर रहा है। बांग्लादेश ने जमाखोरी रोकने के लिए भी सख्त नियम बनाए हैं। आयातकों को चावल की बिक्री और स्टॉक की जानकारी जिला खाद्य नियंत्रकों को देनी होगी।
