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भारत 2030 तक बन सकता है 4,000 डॉलर प्रति व्यक्ति आय वाला देश, एसबीआई रिपोर्ट ने बताया बड़ा लक्ष्य

India News: देश की अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार पकड़ रही है। एसबीआई रिसर्च की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत अगले चार वर्षों में यानी 2030 तक प्रति व्यक्ति आय 4,000 डॉलर का ऐतिहासिक आंकड़ा छू सकता है। इस उपलब्धि के साथ ही भारत ‘अपर मिडिल इनकम कंट्री’ की श्रेणी में पहुंच जाएगा। इस समूह में चीन और इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हैं।

आर्थिक विकास की गति हुई तेज

रिपोर्ट में भारत के आर्थिक सफर की तेज रफ्तार को रेखांकित किया गया है। देश को आजादी के बाद पहली बार 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में लगभग 60 साल लगे। लेकिन इसके बाद गति काफी बढ़ गई। भारत ने सिर्फ 7 साल में 2014 में 2 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा पार कर लिया। इसके बाद 2021 में 3 ट्रिलियन और 2025 में 4 ट्रिलियन डॉलर के मुकाम पर पहुंच गया।

प्रति व्यक्ति आय में उछाल

एसबीआई के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष ने बताया कि प्रति व्यक्ति आय के मोर्चे पर भी प्रगति उल्लेखनीय है। भारत ने वर्ष 2009 में, आजादी के 62 साल बाद, पहली बार 1,000 डॉलर प्रति व्यक्ति आय हासिल की। इसके बाद यह आंकड़ा 2019 में 2,000 डॉलर पर पहुंचा। अब 2026 तक इसे 3,000 डॉलर और 2030 तक 4,000 डॉलर तक जाने की उम्मीद है। डॉ. घोष ने कहा कि भारत अगले दो वर्षों में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की राह पर भी तेजी से बढ़ रहा है।

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2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य

रिपोर्ट में 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को भी समझाया गया है। डॉ. घोष के मुताबिक, इस लक्ष्य के लिए देश को हर साल प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (जीएनआई) में औसतन 7.5 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि दर से वृद्धि करनी होगी। पिछले 23 वर्षों में भारत ने 8.3 प्रतिशत की दर से वृद्धि हासिल की है, इसलिए यह लक्ष्य संभव दिखता है। हालांकि, अगर उच्च आय वाले दर्जे की सीमा बढ़कर 18,000 डॉलर हो जाती है, तो इसके लिए प्रति व्यक्ति आय वृद्धि दर बढ़ाकर लगभग 8.9 प्रतिशत सालाना करनी होगी।

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जीडीपी वृद्धि दर का लक्ष्य

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि जनसंख्या वृद्धि और मुद्रास्फीति को ध्यान में रखते हुए, अगले 23 वर्षों तक भारत को डॉलर के हिसाब से अपनी नॉमिनल जीडीपी लगभग 11.5 प्रतिशत की दर से बढ़ानी होगी। यह दर कोविड-19 महामारी से पहले के वर्षों में हासिल भी की जा चुकी है। लगातार आर्थिक सुधारों को जारी रखकर ही भारत तेज विकास दर को बनाए रख सकता है और उच्च आय वाली अर्थव्यवस्थाओं की श्रेणी में जगह बना सकता है।

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