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चीन की दादागिरी पर भारत ने तोड़ी चुप्पी, ताइवान ने जो कहा उसे सुनकर ड्रैगन को लगेगी मिर्ची!

New Delhi News: भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बड़ा और साहसिक रणनीतिक बदलाव किया है। ताइवान के विदेश मंत्रालय ने खुले तौर पर भारत का धन्यवाद किया है। यह आभार सिर्फ एक रस्मी शुक्रिया नहीं है, बल्कि चीन के लिए खतरे की घंटी है। ताइवान ने साफ संकेत दिया है कि अब वह और भारत एक ही कतार में खड़े हैं। चीन की बढ़ती सैन्य दादागिरी के बीच भारत के इस कदम ने एशिया की कूटनीति में नया भूचाल ला दिया है।

भारत ने चीन को दिखाया आईना

ताइवान ने भारत को अपना ‘समान विचारधारा वाला साथी’ (Like-minded partner) बताया है। दरअसल, चीन पिछले कुछ समय से ताइवान के आसपास खतरनाक सैन्य अभ्यास कर रहा है। फाइटर जेट्स की घुसपैठ और मिसाइल फोर्स के जरिए ताइवान की घेराबंदी की जा रही है। चीन का मकसद साफ है कि वह ताकत के दम पर ताइवान को डराना चाहता है। लेकिन इस बार भारत चुप नहीं बैठा। भारत ने दो टूक शब्दों में कहा कि ताइवान स्ट्रेट में शांति भंग करना और सैन्य उकसावेबाजी स्वीकार नहीं है।

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सिर्फ ट्वीट नहीं, बड़ा रणनीतिक इशारा

कूटनीति में हर शब्द का गहरा मतलब होता है। ताइवान का भारत को रणनीतिक साझेदार कहना चीन को सबसे ज्यादा चुभ रहा है। गलवान घाटी की घटना के बाद से चीन पर भारत का भरोसा पूरी तरह टूट चुका है। भारत अब ‘चुप रहने’ की पुरानी नीति को छोड़कर आक्रामक कूटनीति अपना रहा है। ताइवान स्ट्रेट में स्थिरता अब भारत के समुद्री हितों (Maritime Interest) के लिए भी जरूरी हो गई है। भारत ने साफ कर दिया है कि वह नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और फ्री नेविगेशन के पक्ष में खड़ा है।

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चिप, तकनीक और भविष्य की दोस्ती

यह रिश्ता सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार भविष्य की तकनीक से भी जुड़े हैं। ताइवान दुनिया का सबसे बड़ा सेमीकंडक्टर (चिप) हब है। भारत को अपनी टेक्नोलॉजी जरूरतों के लिए ताइवान की सख्त जरूरत है। दोनों देश सप्लाई चेन को चीन से हटाकर सुरक्षित बनाना चाहते हैं। चीन का सबसे बड़ा डर यही है कि ताइवान को दुनिया का समर्थन मिल रहा है। भारत का यह खुला समर्थन चीन की ‘वन चाइना पॉलिसी’ के नैरेटिव पर सीधी चोट है।

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