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बढ़ते लॉकडाउन का असर:15 दिनों में ट्रक किराये में आई 7% की गिरावट, सब्जियों, फलों और गेहूं की आवक में केवल 10% की बढ़त

कोरोना का असर ट्रक की आवाजाही पर ज्यादा पड़ने लगा है। पिछले 15 दिनों में इस वजह से ट्रक के किराये में 5-7% की कमी आ गई है। लॉकडाउन की वजह से ट्रकों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।

लॉकडाउन से आवाजाही पर असर

कोरोना की वजह से लॉकडाउन लगा हुआ है। राज्यों के इस लॉकडाउन से ट्रक की आवाजाही पर असर हुआ तो इसके किराए में कमी आ गई। इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च (IFTRT) के मुताबिक, ट्रकों के किराये में आगे और गिरावट आ सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि देश के APMC बाजार में गर्मी के फलों, सब्जियों और गेहूं जैसे सामानों की आवक 10-15% से ज्यादा नहीं बढ़ी है।

कार्गो की ऑफरिंग में कमी 

IFTRT के मुताबिक, कार्गो की ऑफरिंग में कमी के चलते और लॉकडाउन की वजह से फैक्टरीज खासकर छोटे कारोबार ज्यादातर राज्यों में बंद हो गए हैं। इससे जिन कारोबारियों के पास पुराने ट्रक हैं, वे नए ट्रकों को फिलहाल नहीं खरीद रहे हैं। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि कमर्शियल व्हीकल का प्रोडक्शन भी रुका हुआ है। IFTRT ने कहा कि रोड ट्रांसपोर्ट सेक्टर आगे भी बारिश के मौसम के लिए तैयार हो रहा है।

65% ट्रक रोड से गायब हैं

ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के मुताबिक, देश में करीबन 65% ट्रक रोड से गायब हैं। ट्रक इंडस्ट्री को इससे करीबन 42 हजार करोड़ रुपए का नुकसान अप्रैल से इस महीने में अब तक हुआ है। जीवनावश्यक वस्तुओं और देश की लाइफ लाइन के रूप में ट्रक इंडस्ट्री को देखा जाता है। लेकिन राज्यों के प्रतिबंधों ने इसे रोड से गायब कर दिया है।

लोन पर मोरेटोरियम दिया जाए 

ट्रक इंडस्ट्री ने सरकार से लोन के किस्तों को मोरेटोरियम के रूप में राहत की मांग भी की है। साथ ही बिना किसी गारंटी के लोन देने और टैक्स को माफ किए जाने की मांग की गई है। इंश्योरेंस की तारीख को भी बढ़ाने की मांग इस इंडस्ट्री ने की है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के कोर कमिटी के चेयरमैन बल मलकीत सिंह ने कहा कि अगर राहत नहीं मिलती है तो यह इंडस्ट्री पूरी तरह से बिजनेस से बाहर हो जाएगी और बड़े पैमाने पर बेरोजगारी बढ़ेगी।

देश का 80 पर्सेंट हिस्सा लॉकडाउन में 

कोरोना की वजह से देश का करीबन 80% हिस्सा लॉकडाउन में है। इसके परिणामस्वरूप 95 लाख ट्रकों में से 55 लाख ट्रक रोड से हट गए हैं क्योंकि मांग नहीं है। 40 लाख ट्रक इस समय रोड पर हैं। उन्होंने कहा कि मई की शुरुआत से प्रति दिन इस इंडस्ट्री को 1,600 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। जबकि अप्रैल में यह 400 करोड़ रुपए था। मई में इसलिए नुकसान बढ़ गया क्योंकि ज्यादातर राज्यों ने प्रतिबंध लगा दिया। अप्रैल के पहले 15 दिनों में इस इंडस्ट्री को 400 करोड़ रुपए का जो हर दिन नुकसान था, वह अप्रैल के अंत में 800 करोड़ रुपए हो गया। साथ ही डीजल की बढ़ती कीमतों ने भी ट्रकों के बिजनेस पर असर डाला है।

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