Mandi News: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी पर कचरा प्रबंधन में गंभीर लापरवाही के आरोप लगे हैं। हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एक औचक निरीक्षण के दौरान संस्थान द्वारा कचरे को खुले में डंप और जलाए जाने की बात पाई है। इस पर बोर्ड ने आईआईटी को एक नोटिस जारी कर सफाई मांगी है।
निरीक्षण में पाया गया कि संस्थान का कचरा कमांद के अनरेहड़ मार्ग पर डाला जा रहा था। वहां कचरे को अलग करने और उसके संग्रहण की कोई उचित व्यवस्था नहीं थी। निरीक्षण दल को कचरा जलाए जाने के स्पष्ट निशान भी मिले, जो पर्यावरण नियमों का सीधा उल्लंघन है।
आईआईटी और नगर निगम के बयान में अंतर
आईआईटी मंडी ने पहले दिए गए अपने रिकॉर्ड में दावा किया था कि कचरे का निष्पादन नगर निगम द्वारा किया जाता है। लेकिन नगर निगम ने इस दावे से इनकार कर दिया। नगर निगम के अनुसार, उनकी कोई भी गाड़ी कचरा लेने के लिए संस्थान की ओर नहीं जाती है। इससे संस्थान के दावों की सच्चाई पर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
ऊहल नदी और पर्यावरण को खतरा
संस्थान का कैंपस ऊहल नदी के किनारे चौदह किलोमीटर में फैला हुआ है। यहां से निकलने वाले सूखे और गीले कचरे, ई-कचरे और प्लास्टिक कचरे का अनियंत्रित निष्पादन नदी और आसपास के पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है। प्रदूषण का सीधा असर जल स्रोत और पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ रहा है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मंडी के प्रभारी विनय कुमार ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि औचक निरीक्षण के बाद संस्थान को नोटिस भेजा गया है। संस्थान से जवाब मांगा गया है कि वह अपने कचरे का निष्पादन किस प्रकार करता है। यदि जवाब संतोषजनक नहीं हुआ तो नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आईआईटी मंडी की स्थापना वर्ष 2009 में हुई थी। इसके उत्तर और दक्षिण दो कैंपस हैं। एक प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान होने के बावजूद वह अपने कचरे के प्रबंधन का उचित समाधान नहीं खोज पाया है। यह मामला संस्थानिक जिम्मेदारी और पर्यावरणीय नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

