चरित्र पर शक होने पर शराबी पति ने पत्नी के साथ राक्षसाें जैसी हरकत कर दी। उसने फरसे से पत्नी के बाएं हाथ की हथेली और बाएं पैर का पंजा काट दिया। पड़ाेसियाें ने जब चीख-पुकार सुनी ताे पुलिस काे सूचना दी। आराेपी काे गिरफ्तार कर लिया गया है। महिला गंभीर हालत में हमीदिया में भर्ती है।

यहां डॉक्टरों ने लंबे ऑपरेशन के बाद हथेली को तो री-इंप्लांट कर दिया। वहीं, पैर के पंजे की प्लास्टिक सर्जरी की है। हालांकि महिला की जान को खतरा नहीं है। उसे रिकवरी रूम में रखा गया है। डॉक्टर्स का कहना है कि हथेली मूवमेंट कर रही है या नहीं, इसका पता 48 घंटे में चलेगा।

निशातपुरा थाना प्रभारी महेंद्र सिंह चाैहान के मुताबिक घटना मंगलवार रात करीब 11:30 बजे निशातपुरा स्थित पारस काॅलाेनी की है। यहां हाेशंगाबाद निवासी 32 वर्षीय प्रीतम सिंह सिसाेदिया पत्नी संगीता और 7 साल के बेटे के साथ रहता है। प्रीतम मेहनत-मजदूरी करता है, जबकि संगीता इंदौर की एक फैक्टरी में सुपरवाइजर है। वह 15-15 दिन में इंदौर से भोपाल आती-जाती रहती है। बेटा पिता के पास ही रहता है।

पत्नी फोन पर बात करती थी, इसी बात से रहता था नाराज
घर आने पर संगीता अक्सर फोन पर बात करती थी। इस बात को लेकर पति एतराज करता था। मंगलवार की रात प्रीतम शराब के नशे में धुत था। उसने पत्नी के चरित्र पर सवाल उठाए ताे विवाद बढ़ गया। प्रीतम ने गुस्से में फरसा उठाया और पत्नी के बाएं पैर का पंजा और बाएं हाथ की हथेली काट कर अलग कर दी। हमले के बाद दर्द से कराह रही संगीता बदहवास हो गई।

हमले के बाद फरसा लिए घर में खड़ा रहा आरोपी, पुलिस ने बातों में उलझा कर दबोचा
वारदात के बाद आरोपी प्रीतम घर पर ही रहा। पुलिस जब पहुंचीं, तब वह कमरे में फरसा लिए खड़ा था। बोल रहा था कि पुलिस पकड़ने आई तो उन पर भी हमला करूंगा। इस बीच, चार्ली टीम के सिपाही शैलेंद्र ने प्रीतम को बातों में उलझाया और सिपाही राहुल सिकरवार ने सीढ़ियों से कमरे में पहुंचकर उसे दबोच लिया। पुलिस ने प्रीतम पर हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया है, जबकि संगीता की कटी हुई हथेली और पंजे को हमीदिया ले जाकर डॉक्टरों को सौंपा।

6 घंटे के ऑपरेशन के बाद हाथ का पंजा री-इंप्लांट किया

गांधी मेडिकल कॉलेज के हड्‌डी रोग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. राहुल वर्मा ने बताया कि महिला को देर रात हमीदिया अस्पताल लाया गया था। उसका बायां हाथ कलाई से और बायां पैर का पंजा भी कटा हुआ था। रात करीब 2 बजे 4 डॉक्टरों की टीम ने ऑपरेशन किया। इसमें कार्डियक सर्जन डॉ. सागर, प्लास्टिक सर्जन डॉ. हरी शंकर, ऑर्थोपेडिक विभाग के डॉ. वैभव जैन और एनेस्थिसिया विभाग के डॉक्टर शामिल थे।

हथेली का री-इंप्लांटेशन कर दिया गया जिसे थैली में लेकर आए थे। इसमें हडि्डयों को तारों से और खून की नशों को जोड़ दिया गया। यह सरवाइव कर रहा है या नहीं 48 घंटे में पता चलेगा। ऑपरेशन सुबह करीब 8 बजे तक चला। कटे पैर को भी री-इंप्लांट करने का प्रयास किया गया, लेकिन वह नहीं हो सका। इसके बाद उसे प्लास्टिक सर्जरी से कवर कर दिया गया।

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