International News: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद दुनिया दो बड़े धड़ों में बंट गई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की आपात बैठक में अमेरिका चौतरफा घिर गया है। रूस और चीन ने अमेरिका की इस सैन्य कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय अपराध बताया है। वहीं कोलंबिया ने इसे किसी देश की संप्रभुता का खुला उल्लंघन करार दिया है। पूरे लैटिन अमेरिका में इस घटना के बाद भारी तनाव पैदा हो गया है।
रूस ने लगाया ‘राजकीय आतंकवाद’ का गंभीर आरोप
रूस ने सुरक्षा परिषद में अमेरिका की कड़ी भर्त्सना की। रूसी प्रतिनिधि ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की तत्काल रिहाई की मांग की है। रूस के अनुसार वाशिंगटन ने वेनेजुएला की संप्रभुता को कुचलकर दुनिया के सामने खतरनाक मिसाल रखी है। रूस ने साफ कहा कि अमेरिका ने बातचीत का रास्ता छोड़कर बंदूक के दम पर लोकतंत्र की हत्या की है। रूसी दूतावास ने अमेरिकी कार्रवाई को ‘राजकीय आतंकवाद’ के समान बताया है।
अमेरिका की सफाई: ‘यह कब्जा नहीं, कानूनी कार्रवाई है’
दुनिया भर के देशों के विरोध के बीच अमेरिका ने अपना बचाव किया। अमेरिकी प्रतिनिधि ने कहा कि उनका इरादा वेनेजुएला पर कब्जा करना नहीं है। उन्होंने इसे युद्ध के बजाय एक ‘लॉ एनफोर्समेंट एक्शन’ (कानूनी कार्रवाई) बताया। अमेरिका ने मादुरो को राष्ट्रपति मानने से इनकार कर दिया है। उन्होंने मादुरो को महज एक ‘नार्को-ट्रैफिकर’ यानी नशीले पदार्थों का तस्कर करार दिया। अमेरिका का तर्क है कि मादुरो पर अब अमेरिकी अदालत में मुकदमा चलाया जाएगा।
यूरोपीय देशों ने जताई ‘खतरनाक मिसाल’ की चिंता
डेनमार्क और लातविया जैसे देशों ने अमेरिका की इस एकतरफा सैन्य कार्रवाई पर चिंता जताई है। डेनमार्क ने सुरक्षा परिषद में कहा कि यह घटना एक ‘खतरनाक मिसाल’ पेश करती है। इन देशों ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय कानून का हर हाल में पालन होना चाहिए। पनामा ने भी वेनेजुएला की बिगड़ती मानवीय स्थिति के लिए मादुरो शासन को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि पनामा ने भी किसी भी देश में बाहरी हस्तक्षेप का विरोध किया है।
संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी: संप्रभुता पर मंडराता खतरा
UN अंडर-सेक्रेटरी जनरल रोज़मेरी डिकार्लो ने इस स्थिति को अत्यंत गंभीर बताया है। उन्होंने चेतावनी दी कि 3 जनवरी की कार्रवाई से भविष्य में किसी भी देश की संप्रभुता सुरक्षित नहीं रहेगी। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से कानून की शक्ति को सर्वोपरि रखने की अपील की। कोलंबिया ने भी मांग की है कि तनाव कम करने के लिए तत्काल कूटनीति का सहारा लिया जाना चाहिए। यदि समाधान नहीं निकला तो लैटिन अमेरिका में एक बड़ा संघर्ष छिड़ सकता है।
