हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनावों को ध्यान में रखते हुए, पुलिस महानिदेशक ने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियों पर रोक लगा दी है। इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है और चुनावों में पुलिस की अधिकतम उपस्थित को लेकर यह फैसला लिया गया है ताकि कोई अनहोनी घटना ना घटे। यहां तक छुट्टी पर गए जवानों को भी वापिस ड्यूटी पर बुला लिया गया है।

सरकार और पुलिस महानिदेशक ने यह फैसला तो ले लिया, लेकिन बीच में एक सवाल उठ रहा है कि हिमाचल में पुलिस कर्मियों की छुट्टियां खुलती कब है। आपको बता दें कि हिमाचल प्रदेश में शायद ही कोई ऐसा थाना होगा जहां पूरा स्टाफ मौजूद है। पुलिस कर्मी कम स्टाफ के चलते 18-18 घण्टे काम करने पर मजबूर है। क्योंकि अपराध ऐसी घटना है जो कभी भी और कहीं भी घटित हो सकती है। जिसके चलते साल भर पुलिस कर्मी अपनी ड्यूटी करते नजर आते है। अपराध, नशे, उच्च अधिकारियों की सुरक्षा, वीआईपी लोगों की सुरक्षा, विधायकों, सांसदों, मंत्रियों आदि के कारण शायद ही हिमाचल पुलिस के जवानों को पूरी छुट्टियां मिलती है।

पुलिस 18-18 घंटे ड्यूटी क्यों करती है
हिमाचल प्रदेश पुलिस साल भर हर मौके पर ड्यूटी करती है। फिर चाहे वह किसी भी धर्म का कोई भी त्यौहार हो। नवरात्रों, मेलों, धार्मिक अनुष्ठानों से लेकर सरकार द्वारा आयोजित कार्यक्रमों से लेकर मंत्रियों, विधायकों, सांसदों, पार्टी अध्यक्षों, मुख्यमंत्री से लेकर राष्ट्रीय नेताओं की रैलियां तक पुलिस के जवानों के सिर पर होते है। इतना ही नही पुलिस के जवान पुलिस के उच्च अधिकारियों की सुरक्षा के लिए लगाए जाते है जहां छुट्टियों के नाम पर किसी को कुछ नही मिलता।

18 घंटे की नौकरी के बाद पुलिस को क्या मिलता है
जानकारी के मुताबिक 18-18 घंटे ड्यूटी करने के बाबजूद पुलिस के जवानों को वह सुविधाएं नही मिलती जिनके पुलिस के जवान हकदार है। एक पुलिस के जवान को हर महीने खाने के लिए महज 200 रुपये दिए जाते है। जबकि हिमाचल में एक समय का अच्छा खाना खाने के लिए 600 से 1000 रुपये तक का खर्चा आता है। हर पुलिस के जवान को खाने के लिए अपनी तनख्वाह में से पैसे खर्च करने पड़ते है। तब भी उनको अच्छा खाना नही मिलता। अगर जवान पुलिस स्टेशन में खाना खाए तो उसका खाने का खर्च हर महीने 2200 से 2700 के बीच आता है। जो हर जवान को अपनी जेब से देना पड़ता है। अगर इस बीच कोई उच्च अधिकारी थाने में आ गया तो उसका खर्च अलग से देना पड़ता है।

इसके विपरीत अगर हम एक कैदी के खर्च के साथ पुलिस जवान के खर्चे की तुलना करें तो आपको जानकर हैरानी होगी कि एक कैदी को सुबह 6 बजे चाय और चन्ने, 10 बजे पूरा खाना, 3 बजे फिर से चाय और कुछ ना कुछ खाने को और शाम को 7 बजे फिर भरपेट खाना मिलता है। हर कैदी को हर हफ्ते नहाने और कपड़े धोने के लिए साबुन, तेल, दाढ़ी करने के लिए ब्लेड, सेल में टीवी, फैन, हीटर, समेत स्वास्थ्य सेवाएं तक मुफ्त में सरकार की ओर से दी जाती है।

हिमाचल प्रदेश पुलिस के जवान इतना कुछ देश के लिए करने के बाबजूद आज भी शोषण का शिकार है। 2015 में भर्ती किए गए पुलिस के जवानों का कॉन्ट्रेक्ट पीरियड 8 साल का है। जबकि बाकी सभी विभागों में 2 या 3 साल से ज्यादा का कॉन्ट्रैक्ट पीरियड नही है। हिमाचल प्रदेश सरकार इस तरह की तानाशाही पूर्ण प्रणाली लागू करके पुलिस का शोषण कर रही है। इन सब हालातों के मध्यनजर यह सवाल उठना जायज है कि आखिर हिमाचल में पुलिस के जवानों की छुट्टियां खुलती कब है?

By RIGHT NEWS INDIA

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