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सरकार से ज्यादा संवेदनशील है दलित, सरकार दलितों को न्याय दिलाने में असमर्थ- बंशी लाल

हिमाचल प्रदेश में दलितों के अधिकरों की रक्षा कितनी होती है, इस बात का पता इस बात से ही चल जाता है कि करसोग में पिछले 10 दिन से सफाई कर्मी हड़ताल पर थे लेकिन आज तक उनको सुनने या उनके साथ हुई जातीय पर हुई प्रताड़ना के केस में कोई कार्यवाही नही हुई। कोरोना महामारी सिर पर है, सरकार ने कोरोना कर्फ्यू की घोषणा की तो जन सेवा करने के लिए समस्त अनुसूचित जाति के लोग धरना छोड़ काम पर डट गए। ताकि बीमारी ज्यादा ना फैले। लेकिन सरकार, प्रशासन और पुलिस उनके साथ खड़ी नही हुई।

यह बेहद शर्मनाक है कि खुद को दलित हितैषी कहने वाली सरकार ने आज तक आरोपी के खिलाफ कोई कार्यवाही अमल में नही लाई। सरकार जातीय बंधन में बंधी इतनी लाचार नजर आ रही है कि अनुसूचित जाति के लोगों को न्याय दिलाने के लिए एक बीडीओ को निलंबित नही कर सकी। साफ नजर आ रहा है कि सरकार दलितों के प्रति संवेदनहीन है और उधर दलित लोगों के प्रति संवेदनशील है।

आज समाज सेवी व वाइस चेयरमैन बंसीलाल द्वारा सफाई कर्मचारियों के हाथों में काली पट्टी बांधकर अपना विरोध प्रदर्शन के साथ-साथ, करोना महामारी के चलते लोगों को किसी प्रकार की असुविधा ना हो। इसलिए खुद बंसीलाल सफाई कर्मचारियों के साथ खुद सफाई करने इनके साथ उतरे। ताकि हमारे मानव समाज को इस महामारी के समय किसी प्रकार की समस्या ना हो। ना ही अन्य कोई बीमारियां इस गंदगी से ना फैले।

बंसीलाल नहीं कहा कि विमला की हक की लड़ाई हम लड़ते रहेंगे और साथ में हम मानवता का फर्ज भी निभा निभाएंगे। विमला को इंसाफ दिलाने के लिए हमारी हड़ताल अभी जारी है। क्योंकि 3 सफाई कर्मचारी अभी भी हड़ताल पर बैठे हैं, जो हर दिन वहां पर बैठे रहेंगे, जब तक विमला देवी को इंसाफ नहीं मिलता। अगर सरकार और प्रशासन ने बीडीओ के खिलाफ जल्दी कोई कार्यवाही नहीं की तो यह आंदोलन और तेज होगा और द्वारा सभी सफाई कर्मचारी हड़ताल पर जाएंगे और जो विमला के साथ में साथ में खड़े हैं वह सभी सड़कों में इसका जिम्मेदार प्रशासन व सरकार होगी।

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