साइबर फ्रॉड का शिकार होने पर ऐसे पाए पैसा वापिस, जानिए क्या है प्रोसेस

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भारत तेजी से डिजिटल (Digital) हो रहा है. इस बदलाव के कई फायदे भी हैं और कई नुकसान भी. जैसे जैसे हम डिजिटल इंडिया की तरफ आगे बढ़ रहे हैं वैसे ही ऑनलाइन फाइनेंशियल फ्रॉड (Online Financial Fraud ) के केस भी तेजी से बढ़ रहे हैं. इस वक्त फाइनेंशियल ठगी में काफी बढ़ोतरी हुई है. कई लोग इस ठगी का शिकार हुए हैं. अगर आप भी इस तरह की ऑनलाइन ठगी (online Fraud) के शिकार हुए हैं तो आपको यहां हम बता रहे हैं कुछ जरूरी कदम जिसे उठा कर आप अपने पैसे वापस पा सकते हैं.

तुरत लें एक्शन

अगर आप किसी ऑनलाइन फाइनेंशियल फ्रॉड (Online Financial Fraud) का शिकार हो गए हैं तो तुरंत एक्शन लें.

कई बार लोगों को ये समझ ही नहीं अता कि ऐसा होने पर क्या करें. लेकिन, आपको घबराने की बजाय उन तरीकों के बारे में सोचना चाहिए कि जिससे आपके पैसों की वापसी भी हो जाए और साइबर क्रिमिनल भी पकड़ा जाए. रिजर्व बैंक (RBI) के मुताबिक, अगर आपको किसी अवैध इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन का शिकार हो जाते हैं तो आपकी जिम्मेदारी शून्य भी हो सकती है. लेकिन, ऐसा तभी होगा अगर आप इस बारे में तुरंत ही अपने बैंक को बता देते हैं.

तीन दिन के भीतर करें रिपोर्ट

अगर आप साइबर फ्रॉड (Online Financial Fraud) के शिकार हो जाते हैं या हुए हैं और आपके खाते से पैसा चला जाता है तो आपको तीन दिन के भीतर इसकी शिकायत जरूर करनी चाहिए. इसके लिए आप https://www.cybercrime.gov.in/ पर या स्थानीय पुलिस थाने में जाकर भी इसकी शिकायत कर सकते हैं.

पैसे होंगे रिफंड

आप साइबर फ्रॉड के खिलाफ सख्त कदम उठाते हैं तो आपको किसी भी तरह का नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा और आपको 10 दिन के भीतर ही रिफंड मिल सकता है.अगर आप ऐसे ऑनलाइन फाइनेंशियल फ्रॉड का शिकार हो जाते हैं तो चुप बिल्कुल मत रहिये. आप संबंधित जानकारी के साथ ही बैंक को लिखित में इसकी जानकारी दें और शिकायत दर्ज करानी चाहिए.

ये है हेल्पलाइन

साइबर फ्रॉड (Online Financial Fraud) से हुए फाइनेंशियल नुकसान से बचाने के लिए एक नेशनल हेल्पलाइन 155260 को भी लॉन्च किया गया है. लेकिन, फिलहाल ये सेवा छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तेलंगाना, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश जैसे 7 राज्यों में ही उपलब्ध है. हालांकि, जल्द ही दूसरे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी लॉन्च कर दिया जाएगा. एक रिपोर्ट में बताया गया है किअप्रैल 2009 से सितंबर 2019 के बीच 1.17 लाख ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड के जरिए लोगों को 615.39 करोड़ रुपये की चोट उठानी पड़ी है.

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