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“हिम्मत कैसे हुई…” भरी अदालत में जब बुरी तरह भिड़ गए सिब्बल और ASG, जज को कहना पड़ा- शांत हो जाओ!

New Delhi News: दिल्ली हाईकोर्ट में सोमवार का दिन बेहद गहमागहमी भरा रहा। जमीन के बदले नौकरी मामले (Land for Jobs scam) की सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम जंग का मैदान बन गया। पूर्व रेल मंत्री लालू यादव की पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और सीबीआई के वकील एएसजी एसवी राजू के बीच तीखी नोकझोंक हुई। बहस इतनी बढ़ गई कि सिब्बल ने गुस्से में पूछ लिया- “आपकी हिम्मत कैसे हुई?” माहौल गरमाता देख जज को बीच-बचाव करना पड़ा।

“गुमराह करने” के आरोप पर भड़के सिब्बल

मामले की सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने सीबीआई की जांच पर सवाल उठाए। उन्होंने तर्क दिया कि सीबीआई खुद क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर चुकी थी, तो अब मंजूरी का सवाल क्यों? इस पर सीबीआई की तरफ से पेश एएसजी एसवी राजू ने कड़ी आपत्ति जताई। राजू ने आरोप लगाया कि सिब्बल कानून को गलत तरीके से पेश कर रहे हैं और कोर्ट को गुमराह कर रहे हैं। बस इसी बात पर सिब्बल का पारा चढ़ गया।

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“आप जज नहीं हैं…”

सिब्बल ने गुमराह करने के आरोप को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने एएसजी राजू पर पलटवार करते हुए कहा, “मुझ पर ऐसा आरोप लगाने की आपकी हिम्मत कैसे हुई? मैंने अपने पूरे जीवन में कभी किसी अदालत को गुमराह नहीं किया।” सिब्बल यहीं नहीं रुके, उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि आप भारत के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल हो सकते हैं, लेकिन आप जज नहीं हैं।

एएसजी राजू ने भी दिया करारा जवाब

दूसरी ओर, एएसजी राजू भी अपनी बात पर अड़े रहे। उन्होंने कहा कि अदालत को सही कानून बताना उनका कर्तव्य है। राजू ने सिब्बल से कहा, “हाँ, मेरा निवेदन है कि आपने कोर्ट को गुमराह किया है। मैं बताऊंगा कि आपने कैसे गुमराह किया, लेकिन आप मुझे बोलने ही नहीं दे रहे।” जैसे-जैसे बहस तेज हुई, सिब्बल ने राजू के पेशेवर आचरण पर भी सवाल खड़े कर दिए।

जज को देना पड़ा दखल

दोनों वरिष्ठ वकीलों के बीच तनाव बढ़ता देख जस्टिस रविंदर दुदेजा को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने दोनों पक्षों को शांत करते हुए कहा, “आइए माहौल को ठंडा करें।” इसके बाद कोर्ट ने दिन की सुनवाई समाप्त कर दी। अदालत ने दोनों पक्षों को एक हफ्ते के अंदर अपनी लिखित दलीलें जमा करने का निर्देश दिया है। ये दलीलें अधिकतम पांच पन्नों की होनी चाहिए।

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क्या है लैंड फॉर जॉब स्कैम?

लालू यादव ने हाईकोर्ट में अपने खिलाफ चल रहे इस केस को रद्द करने की मांग की है। यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू यादव रेल मंत्री थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरी देने के बदले लोगों से जमीन अपने परिवार के नाम करवाई थी। सीबीआई ने 2022 में इस मामले में केस दर्ज किया था। सिब्बल का तर्क है कि जांच शुरू करने से पहले जरूरी मंजूरी नहीं ली गई थी।

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