कोरोना की दूसरी लहर से देवभूमि हिमाचल में पर्यटन कारोबार पूरी तरह ठप हो गया है। प्रदेश के पर्यटन स्थलों शिमला, मनाली, धर्मशाला और डलहौजी में 50 से 90 फीसदी होटल बंद हो चुके हैं। होटल संचालकों ने छंटनी कर कर्मियों को छुट्टी भेज दिया है। सैलानियों के न आने से राजधानी शिमला का 51 साल पुराना होटल गुलमर्ग रीजेंसी बंद हो गया है। 112 कमरों के इस होटल में 40 कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं, जिन्हें फिलहाल छुट्टी पर भेज दिया है।

होटल प्रबंधन का दावा है कि अगले 2 महीनों तक स्टाफ को वेतन देते रहेंगे, इसके बाद भी हालात नहीं सुधरे तो समस्या आएगी। शिमला के अधिकतर होटलों में एक-दो कर्मी ही हैं। शिमला शहर के 90 फीसदी और मनाली-कुल्लू, चंबा के डलहौजी, सोलन के कसौली, चायल में 50 फीसदी होटल बंद हो चुके हैं।

शिमला शहर के 90 फीसदी और मनाली-कुल्लू, चंबा के डलहौजी, सोलन के कसौली, चायल में 50 फीसदी होटल बंद हो चुके हैं। डलहौजी में 95 प्रतिशत होटल मालिकों ने स्टाफ घर भेज दिया। टैक्सी, ढाबे वालों का काम और साहसिक गतिविधियां सब ठप हो गई हैं।

कुल्लू, मनाली के होटलों में ऑक्यूपेंसी शून्य पहुंच गई है। कई युवा पहली लहर में ही बेरोजगार हो गए हैं। अब बचे लोगों का भी काम छिन गया है। होटलियरों ने बैंक लोन की किस्तों पर बिना ब्याज के साथ एक साल तक राहत देने की मांग उठाई है। होटल एसोसिएशन धर्मशाला के अध्यक्ष अश्वनी बांबा ने बताया कि कोरोना को देखते हुए 15 मई तक धर्मशाला और मैक्लोडगंज के सभी होटल बंद कर दिए हैं। होमस्टे और बेड एंड ब्रेकफास्ट इकाइयां भी बंद हो चुकी हैं।

टूरिज्म इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर्स एसोसिएशन के मुख्य सलाहकार गोपाल अग्रवाल का कहना है कि शिमला में 90 फीसदी होटल बंद हो गए हैं। होटलियर्स एसोसिएशन मनाली के अध्यक्ष अनूप ठाकुर का कहना है कि यहां 50 फीसदी होटल बंद हो चुके हैं। कुल्लू जिले में 1500 होटल व होमस्टे बंद हो गए हैं। कामकाज न होने से होटल मालिकों ने स्वयं ही ताले लगा दिए हैं। होटल एसोसिएशन चायल के अध्यक्ष देवेंद्र वर्मा ने बताया कि यहां होटल कारोबार खत्म हो गया है।

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