Haryana News: हरियाणा की सियासत में राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने एक नया भूचाल ला दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपनी ही पार्टी के उन पांच विधायकों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिन्होंने चुनाव में ‘क्रॉस वोटिंग’ की। हुड्डा ने कड़े लहजे में कहा कि जिन विधायकों ने पार्टी की पीठ में छुरा घोंपा है, उन्हें नैतिकता के आधार पर तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। कांग्रेस खेमे में मचे इस घमासान ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। हुड्डा का यह रुख साफ करता है कि वह अब इन ‘विद्रोहियों’ के लिए पार्टी के दरवाजे बंद करने के मूड में हैं। इस भीतरघात ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति को करारा झटका दिया है।
नैतिकता का हवाला और हुड्डा की ललकार
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने चंडीगढ़ में पत्रकारों से बात करते हुए साफ कहा कि राजनीति में शुचिता जरूरी है। उन्होंने तर्क दिया कि जब विधायक पार्टी के चुनाव चिह्न पर जीतते हैं, तो उन्हें पार्टी के फैसले का सम्मान करना चाहिए। हुड्डा ने उन पांचों विधायकों को चुनौती दी कि यदि उनमें साहस है, तो वे इस्तीफा दें और दोबारा जनता की अदालत में जाकर चुनाव लड़ें। उनका मानना है कि इन विधायकों ने केवल पार्टी के साथ ही नहीं, बल्कि उन मतदाताओं के साथ भी धोखा किया है जिन्होंने कांग्रेस के नाम पर उन्हें वोट दिया था।
भीतरघात ने बिगाड़ा जीत का समीकरण
हरियाणा में राज्यसभा की सीटों के लिए हुआ मुकाबला काफी दिलचस्प था। कांग्रेस को उम्मीद थी कि उसके सभी विधायक एकजुट रहेंगे, लेकिन ऐन वक्त पर पांच विधायकों ने पाला बदल लिया। इन विधायकों के क्रॉस वोटिंग करने से पार्टी उम्मीदवार की हार का रास्ता साफ हो गया। इसके बाद से ही हुड्डा समर्थकों और संगठन के बीच भारी नाराजगी देखी जा रही है। पार्टी अब इन विधायकों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की तैयारी में है, ताकि भविष्य में इस तरह की अनुशासनहीनता को रोका जा सके।
कौन हैं वो 5 विधायक? रडार पर ‘बागी’
हालांकि अधिकारिक तौर पर नामों की सूची प्रक्रिया में है, लेकिन हुड्डा के इस बयान ने उन विधायकों की नींद उड़ा दी है जो पार्टी के भीतर रहकर विरोधी खेमे की मदद कर रहे थे। हरियाणा कांग्रेस में गुटबाजी की खबरें नई नहीं हैं, लेकिन राज्यसभा चुनाव में यह दरार पूरी तरह उजागर हो गई है। हुड्डा ने संकेत दिया है कि वह इस मामले को आलाकमान के सामने मजबूती से रखेंगे। माना जा रहा है कि इन विधायकों को आने वाले विधानसभा चुनावों में टिकट से भी हाथ धोना पड़ सकता है।
हरियाणा की राजनीति पर क्या होगा असर?
इस सियासी ड्रामे का असर केवल राज्यसभा तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले समय में हरियाणा की राजनीति में बड़े फेरबदल की संभावना है। हुड्डा के इस कड़े रुख ने पार्टी के वफादारों में उत्साह भरा है, लेकिन बागी गुट भी चुप बैठने वाला नहीं है। क्या ये पांच विधायक हुड्डा की मांग को स्वीकार करेंगे या वे किसी और दल का दामन थामेंगे? यह सवाल अब पूरी राज्य की जनता के मन में है। कांग्रेस के लिए चुनौती अब अपने बिखरे हुए कुनबे को समेटने की है।


