Himachal News: हिमाचल प्रदेश सहित पूरे हिमालयी क्षेत्र में इस साल सर्दियों के दौरान उम्मीद के मुताबिक बर्फबारी और बारिश नहीं हुई है। मौसम चक्र में आई इस बड़ी गड़बड़ी ने वैज्ञानिकों और आम जनता को चिंता में डाल दिया है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मंडी के विशेषज्ञों ने इसके पीछे के वैज्ञानिक कारणों का खुलासा किया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, वैश्विक स्तर पर हवा के दबाव और परिसंचरण चक्र (Circulation Cycle) में आई खराबी इस सूखे का मुख्य कारण है।
अटलांटिक क्षेत्र से नमी की कमी बनी बाधा
IIT मंडी में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. डेरिक्स पी. शुक्ला ने बताया कि उत्तर-पश्चिम हिमालय को नमी पहुंचाने वाली हवाएं कमजोर पड़ गई हैं। आमतौर पर अटलांटिक क्षेत्र से आने वाली हवाएं पर्याप्त नमी लेकर हिमालय पहुंचती हैं। इस बार अटलांटिक द्वीपों से हवा का प्रसार सही दिशा और तीव्रता में नहीं हो पाया। नमी की इसी कमी के कारण पहाड़ी राज्यों में न तो बारिश हुई और न ही सामान्य हिमपात हुआ।
ग्लोबल वार्मिंग और पश्चिमी विक्षोभ का असर
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘बर्फ के अकाल’ के पीछे ग्लोबल वार्मिंग सबसे बड़ी वजह है। वैश्विक तापमान बढ़ने से समुद्र की सतह गर्म हो गई है। इससे हवा के प्रवाह और नमी वहन करने की क्षमता पर बुरा असर पड़ा है। इसके अतिरिक्त, जेट स्ट्रीम की गति और स्थिति में बदलाव ने ‘पश्चिमी विक्षोभ’ (Western Disturbance) को काफी कमजोर कर दिया है। यही कारण है कि हिमालय तक पहुंचने वाली बर्फीली हवाओं की आवृत्ति घट गई है।
गर्मियों में बढ़ सकता है जल संकट
डॉ. शुक्ला ने चेतावनी दी है कि हिमपात की कमी का असर लंबे समय तक दिखेगा। हिमालय के ग्लेशियरों से मिलने वाला पानी हमारी नदियों, खेती और पेयजल के लिए अनिवार्य है। यदि बर्फबारी कम रही, तो आने वाली गर्मियों में भयानक जल संकट पैदा हो सकता है। कम बर्फबारी के कारण इस साल भीषण गर्मी पड़ने के भी आसार हैं।
राहत की उम्मीद बरकरार
हालांकि, मौसम के वर्तमान संकेत कुछ राहत दे रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सप्ताह के अंत तक हिमाचल के कुछ क्षेत्रों में बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में हिमपात की संभावना है। परिसंचरण चक्र में सुधार होने से सूखे का लंबा दौर खत्म हो सकता है।
