हिमाचल में बजट वादों की खुली पोल: 3 साल से फाइलों में कैद हैं योजनाएं, जनता पूछ रही सवाल

Himachal News: बजट आते हैं और चले जाते हैं। विधानसभा में खूब तालियां बजती हैं। लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ और होती है। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार 21 मार्च को अपना चौथा बजट पेश करेगी। लेकिन पिछले तीन बजट के कई वादे आज भी फाइलों में कैद हैं। जनता अभी भी इन वादों के पूरे होने का इंतजार कर रही है। विकास की कई बड़ी उम्मीदें सरकारी दफ्तरों में धूल खा रही हैं। कुछ योजनाओं पर तो अभी तक काम ही शुरू नहीं हो पाया है।

क्या हुआ पुराने बड़े वादों का?

वर्ष 2023-24 के बजट में सरकार ने बड़े-बड़े सपने दिखाए थे। हिमाचल को ‘ग्रीन एनर्जी स्टेट’ बनाने का बड़ा वादा हुआ था। प्रदेश में छह ‘ग्रीन कॉरिडोर’ बनाने की बात कही गई थी। लेकिन तीन साल बाद भी ये वादे जमीन पर नहीं उतर सके हैं। मेधावी छात्राओं को इलेक्ट्रिक स्कूटी खरीदने के लिए 25 हजार रुपये की सब्सिडी मिलनी थी। यह महत्वपूर्ण योजना भी अभी तक सिरे नहीं चढ़ पाई है। कांगड़ा में अंतरराष्ट्रीय गोल्फ कोर्स बनाने का सपना भी अधूरा है।

कौन सी अहम घोषणाएं फाइलों में अटकीं?

पिछले दो वर्षों की कई और योजनाएं भी लालफीताशाही में उलझी हुई हैं। धरातल पर न उतर पाने वाली कुछ प्रमुख घोषणाएं इस प्रकार हैं:

  • चंबा, हमीरपुर और नाहन के मेडिकल कॉलेजों में पैट स्कैन मशीनें लगनी थीं।
  • मनाली में आइस स्केटिंग रिंक का निर्माण होना था, जो नहीं हुआ।
  • हिमाचल की पहली स्क्रब टायफस रिसर्च यूनिट स्थापित होनी थी।
  • मंडी में सोलर पार्क और शिवधाम परियोजना का काम बेहद धीमा है।
  • स्कूलों के बच्चों को पीने के पानी की स्टील की बोतलें नहीं मिल पाई हैं।

क्या कुछ वादे जमीन पर भी उतरे?

ऐसा नहीं है कि सरकार ने कुछ भी नहीं किया। कुछ योजनाएं जमीन पर भी उतरी हैं। महिलाओं को 1500 रुपये महीना देने की शुरुआत हो चुकी है। 600 करोड़ रुपये की युवा स्टार्ट-अप योजना भी लागू की गई है। नशे के खिलाफ सख्त कानून बनाया गया है। खिलाड़ियों की डाइट मनी बढ़ाई गई है। सेब किसानों के लिए यूनिवर्सल कार्टन की अच्छी शुरुआत हुई है। इसके अलावा मुख्यमंत्री सुख शिक्षा योजना को भी सरकार ने लागू किया है।

विपक्ष और विशेषज्ञों ने खड़े किए सवाल

अधूरी योजनाओं पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सरकार के पास संसाधनों की भारी कमी है। राज्य का वित्तीय प्रबंधन भी काफी कमजोर नजर आता है। फिजूलखर्ची रोकने पर भी सरकार का कोई खास ध्यान नहीं है। दूसरी तरफ, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के पिछले वादों की सख्त समीक्षा होनी चाहिए। विपक्ष इस पूरे मुद्दे को विधानसभा में जोर-शोर से उठाएगा।

सरकार का बचाव में क्या है दावा?

बढ़ते सवालों के बीच सरकार अपना बचाव कर रही है। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने सरकार का पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि सभी घोषणाओं पर चरणबद्ध तरीके से काम चल रहा है। कई बार जमीन न मिलने से योजनाओं में काफी देरी हो जाती है। सरकार लगातार अपनी बजट घोषणाओं की समीक्षा कर रही है। ज्यादातर काम पूरे हो चुके हैं और बाकी योजनाओं को भी जल्द धरातल पर उतारा जाएगा।

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