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हिमाचल प्रदेश में मौसम ने बनाया चिंताजनक रिकॉर्ड: 32 साल में पहली बार दिसंबर में मात्र 0.1 मिमी बारिश, सामान्य से 99% कम

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में इस बार दिसंबर का मौसम इतिहास में एक दुर्लभ रिकॉर्ड दर्ज किया है। पूरे महीने में राज्य में केवल 0.1 मिलीमीटर बारिश हुई है। यह आंकड़ा सामान्य बारिश से 99 प्रतिशत कम है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार यह 32 वर्षों में सबसे शुष्क दिसंबर रहा।

124 वर्षों में पांचवीं बार ऐसा मामला

मौसम विभाग के ऐतिहासिक आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि पिछले 124 वर्षों में यह पांचवीं बार है जब दिसंबर में बारिश नहीं हुई। इससे पहले वर्ष 1993 में भी दिसंबर में 0.0 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। दिसंबर के लिए सामान्य बारिश का औसत 38.1 मिलीमीटर माना जाता है।

राज्य में वर्ष 1902, 1907, 1925 और 1939 में भी दिसंबर महीने में बूंदाबांदी नहीं हुई थी। ये सभी वर्ष मौसम के इतिहास में अत्यंत शुष्क दिसंबर के रूप में दर्ज हैं। मौसम वैज्ञानिक इस तरह की घटनाओं को जलवायु परिवर्तन से जोड़कर देख रहे हैं।

सामान्य मौसम चक्र से भारी विचलन

हिमाचल प्रदेश में दिसंबर का महीना आमतौर पर बर्फबारी और अच्छी वर्षा के लिए जाना जाता है। इस समय पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होते हैं जो बारिश और बर्फबारी लाते हैं। लेकिन इस बार यह मौसमी चक्र पूरी तरह से बदल गया है।

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मौसम विभाग ने छह जनवरी तक आसमान साफ रहने की संभावना जताई है। इसका मतलब है कि अगले कुछ दिनों में भी बारिश या बर्फबारी की कोई उम्मीद नहीं है। यह स्थिति कृषि और जल संसाधनों के लिए चिंता का विषय बन रही है।

कृषि और जल संकट पर पड़ेगा प्रभाव

दिसंबर में होने वाली बारिश और बर्फबारी राज्य के जल संसाधनों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होती है। यह नदियों के प्रवाह को बनाए रखने में मदद करती है। सिंचाई और पेयजल आपूर्ति के लिए यह वर्षा जल का महत्वपूर्ण स्रोत है।

शुष्क मौसम का सीधा प्रभाव रबी फसलों पर पड़ेगा। गेहूं और अन्य सर्दियों की फसलों को पर्याप्त नमी नहीं मिल पाएगी। इससे किसानों की फसल उपज पर विपरीत असर पड़ सकता है। फल उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है।

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पर्यटन उद्योग पर भी असर

हिमाचल प्रदेश में शीतकालीन पर्यटन बर्फबारी पर निर्भर करता है। दिसंबर में बर्फ नहीं गिरने से पर्यटकों की संख्या में कमी आई है। मनाली, शिमला और दार्जिलिंग जैसे पर्यटन स्थलों में सामान्य सर्दियों की भीड़ नहीं दिख रही है।

होटल और यात्रा उद्योग को नुकसान हो रहा है। स्कीइंग और अन्य शीतकालीन खेल गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। मौसम विभाग अब जनवरी में बर्फबारी की बेहतर संभावना जता रहा है। पर्यटक इसी आशा में प्रदेश आ रहे हैं।

जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट संकेत

मौसम वैज्ञानिक इस घटना को जलवायु परिवर्तन से जोड़कर देख रहे हैं। उनका मानना है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण मौसम चक्र में बदलाव आ रहा है। पश्चिमी विक्षोभ की तीव्रता और आवृत्ति प्रभावित हो रही है।

यह स्थिति न केवल हिमाचल बल्कि समूचे हिमालयी क्षेत्र के लिए चिंताजनक है। हिमनदों का पिघलना, अनिश्चित मौसम और बदलता मौसम चक्र जलवायु परिवर्तन के स्पष्ट संकेत हैं। इन पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।

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