Himachal News: हिमाचल प्रदेश में मंत्री विक्रमादित्य सिंह के बयान पर सियासत गरमा गई है। अफसरों को लेकर दिए गए उनके बयान पर सरकार में ही अलग-अलग सुर सुनाई दे रहे हैं। जहां मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने उन्हें सख्त नसीहत दी है, वहीं शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने उनका बचाव किया है। इस पूरे मामले ने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है।
सीएम सुक्खू ने सुनाई खरी-खरी
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विक्रमादित्य सिंह के बयान पर नाराजगी जताई है। दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए सीएम ने साफ कहा कि विक्रमादित्य को सिर्फ अपने विभाग से मतलब रखना चाहिए। अधिकारियों को लेकर दिया गया उनका बयान पूरी तरह गलत है। सीएम ने जोर देकर कहा कि ‘पहले भारत है, फिर राज्य’। माना जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात के बाद सीएम ने यह कड़ा रुख अपनाया है।
रोहित ठाकुर ने किया बचाव
विवादों के बीच शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर अपने सहयोगी मंत्री के समर्थन में उतर आए हैं। शिमला में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने विक्रमादित्य सिंह को एक काबिल मंत्री बताया। रोहित ठाकुर ने कहा कि एक बयान के आधार पर सबको नहीं तौलना चाहिए। बाहरी राज्यों के आईएएस और आईपीएस अफसरों का विकास में योगदान रहता है। उन्होंने सीएम सुक्खू से अपील की है कि वे इस मामले में स्थिति स्पष्ट करें ताकि कोई संशय न रहे।
क्या था पूरा विवाद?
यह मामला 12 जनवरी को शुरू हुआ था। विक्रमादित्य सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की थी। इसमें उन्होंने हिमाचल में तैनात यूपी-बिहार के अफसरों पर निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि ये अफसर हिमाचल के हितों की परवाह नहीं कर रहे हैं। मंडी रैली के बाद उन्होंने दोबारा कहा था कि वह अपनी बात पर अडिग हैं और जरूरत पड़ी तो अफसरों के नाम भी सार्वजनिक करेंगे।
अन्य मंत्रियों ने किया किनारा
विक्रमादित्य सिंह इस मामले में अपने ही कैबिनेट सहयोगियों के निशाने पर भी रहे हैं। मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने तीखा हमला बोलते हुए कहा था कि विक्रमादित्य अफसरों से काम नहीं ले पा रहे हैं। मंत्री जगत सिंह नेगी और राजेश धर्माणी ने भी उनके बयान को गलत और नुकसानदेह बताया था। वहीं, डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने बयान न सुनने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया था।
