Himachal News: Himachal Pradesh के बद्दी में प्रस्तावित नए शहर का विरोध तेज हो गया है। सरकार यहाँ चंडीगढ़ की तर्ज पर ‘हिम-चंडीगढ़’ बसाना चाहती है। इसके लिए 3400 बीघा जमीन का अधिग्रहण किया गया है। लेकिन अब किसान इसके खिलाफ खड़े हो गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि विरोध की आग स्थानीय विधायक के अपने गाँव तक पहुँच गई है। ग्रामीणों ने सरकार को चेतावनी दी है कि वे अपनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देंगे।
विधायक के घर से उठी बगावत
सरकार ने बद्दी के पास शीतलपुर में आधुनिक शहर बसाने की घोषणा की है। इस जमीन को हिमुडा के नाम करने के लिए कैबिनेट ने भी मंजूरी दे दी है। लेकिन इस फैसले से दून विधायक रामकुमार चौधरी की गृह पंचायत हरिपुर-संडोली के लोग नाराज हैं। ग्राम पंचायत संडोली और मलपुर के लोगों ने एक बड़ी बैठक की। उनका कहना है कि सरकार ने अचानक यह फैसला लिया है। किसानों या पंचायत से कोई राय नहीं ली गई। इससे वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
बिल्डरों को जमीन देने का आरोप
ग्रामीणों ने दो टूक कहा है कि वे अपनी उपजाऊ जमीन नहीं छोड़ेंगे। संघर्ष समिति के सदस्यों का कहना है कि बद्दी पहले ही प्रदूषण से भरा है। शीतलपुर ही एक मात्र ग्रीन बेल्ट बची है। यहाँ के किसान खेती और दूध बेचकर अपना घर चलाते हैं। आरोप है कि Himachal Pradesh सरकार यह जमीन बिल्डरों को देकर मुनाफा कमाना चाहती है। किसान उजड़कर बसने वाले किसी भी शहर को स्वीकार नहीं करेंगे।
हाईकोर्ट में लड़ेंगे लड़ाई
जमीन बचाने के लिए ग्रामीणों ने एक संघर्ष समिति बनाई है। भाग सिंह कुंडलस को इसका अध्यक्ष बनाया गया है। समिति ने तय किया है कि वे चुप नहीं बैठेंगे। आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। साथ ही, भूमि अधिग्रहण के खिलाफ Himachal Pradesh हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की जाएगी। किसान आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।
