Chandigarh News: हिमाचल प्रदेश ने नकली दवाओं और मादक पदार्थों के अवैध कारोबार के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। चंडीगढ़ स्थित हिमाचल भवन में पड़ोसी राज्यों के औषधि नियंत्रकों की उच्च स्तरीय बैठक आयोजित हुई। बैठक में सर्वसम्मति से तय हुआ कि इस समस्या से निपटने के लिए अलग-अलग प्रयासों के बजाय साझा और संगठित कार्रवाई जरूरी है।
राज्य औषधि नियंत्रक डा. मनीष कपूर ने इस बैठक की अध्यक्षता की। जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों ने इसमें भाग लिया। ऑनलाइन माध्यम से केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग, सीआईडी और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अधिकारियों ने भी बैठक को संबोधित किया।
डा. कपूर ने बताया कि हिमाचल की स्वास्थ्य सचिव सुधा देवी के प्रस्ताव के बाद यह बैठक संभव हो पाई। उन्होंने मंत्रिमंडल के समक्ष रखा था कि यह समस्या पूरे उत्तरी भारत की है। इसके समाधान के लिए राज्यों के बीच तालमेल अनिवार्य है।
बैठक में सभी राज्यों ने केंद्र सरकार से ‘वन नेशन-वन डेडिकेटेड पोर्टल’ बनाने की मांग उठाई। यह पोर्टल निर्माण से लेकर थोक और खुदरा स्तर तक दवाओं की हर खेप पर नजर रखेगा। इसकी पहुंच सभी संबंधित विभागों तक होगी।
प्रतिनिधियों का मानना है कि यह व्यवस्था युवाओं को नशे के जाल से बचाने में मददगार साबित होगी। साथ ही नकली दवाओं की कालाबाजारी पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा। इससे जनस्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
डा. कपूर ने हालिया कार्रवाइयों का जिक्र भी किया। पिछले महीने दवा नियंत्रण प्रशासन ने सीआईडी की टास्क फोर्स के साथ मिलकर राज्य की सभी दवा निर्माण इकाइयों का औचक निरीक्षण किया। आगे भी खुफिया जानकारी के आधार पर यह अभियान जारी रहेगा।


