Mandi News: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में वनस्पति विज्ञान के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता मिली है। डॉ. सुनील वर्मा नामक एक शोधकर्ता ने बारोट घाटी में लाइकोपोडियम जापोनिकम नामक एक दुर्लभ पौधे की खोज की है। यह पहली बार है जब इस प्रजाति के पौधे की हिमाचल प्रदेश में मौजूदगी की पुष्टि हुई है। इस खोज को प्रमुख वनस्पतिशास्त्री प्रोफेसर एस पी खुल्लर ने सत्यापित किया है।
यह पौधा क्लबमॉस के नाम से जाना जाता है। यह लाइकोपोडिएसी परिवार से संबंधित है और एक बीज रहित संवहनी पौधा है। यह खोज हिमालय क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाती है। इससे इस क्षेत्र के पारिस्थितिक तंत्र के अध्ययन के नए द्वार खुलेंगे। डॉ. वर्मा टेरिडोफाइट्स पर 25 वर्षों से शोध कर रहे हैं।
डॉ. सुनील वर्मा सरकाघाट के मूल निवासी हैं। वर्तमान में वे होशियारपुर के डीएवी कॉलेज में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने अपनी स्नातक की शिक्षा सरकाघाट से पूरी की। उसके बाद उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने अपनी पीएचडी की डिग्री पंजाब विश्वविद्यालय से हासिल की।
पौधे का औषधीय महत्व
लाइ कोपोडियम जापोनिकम पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में अपने गुणों के लिए जाना जाता है। इसका उपयोग पाचन संबंधी समस्याओं के इलाज में किया जाता है। यह त्वचा रोगों से छुटकारा दिलाने में भी सहायक माना जाता है। इसके अलावा यह आत्मविश्वास बढ़ाने वाला भी बताया जाता है। होम्योपैथिक दवाएं बनाने में इस पौधे का विशेष महत्व है।
इस पौधे का इस्तेमाल चीन और जापान में सदियों से होता आया है। वहां की पारंपरिक चिकित्सा में इससे मोच और मांसपेशियों के दर्द का इलाज किया जाता है। यह मायस्थेनिया जैसी स्थितियों में भी राहत प्रदान करता है। इसकी खोज से आयुर्वेद और हर्बल मेडिसिन के क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे।
यह खोज इंडियन फर्न जर्नल में प्रकाशन के लिए तैयार है। इस शोध से हिमाचल प्रदेश के वनस्पति इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। डॉ. वर्मा की यह उपलब्धि राज्य के लिए गौरव का विषय है। यह शोध पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

