Himachal News: हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के धर्मशाला में 19 साल की कॉलेज छात्रा की मौत ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। न्याय की मांग को लेकर लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। इस बीच, मुख्य आरोपी असिस्टेंट प्रोफेसर अशोक कुमार ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने साफ कहा है कि अगर वे दोषी साबित होते हैं, तो हर सजा भुगतने के लिए तैयार हैं। राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी प्रोफेसर को सस्पेंड कर दिया है। पूरे Himachal Pradesh में इस घटना की चर्चा जोरों पर है।
वायरल वीडियो और पिता के गंभीर आरोप
मृतक छात्रा का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें वह प्रोफेसर पर मानसिक उत्पीड़न, गलत हरकतें और धमकाने का आरोप लगाती दिख रही है। छात्रा की 26 दिसंबर को लुधियाना के अस्पताल में मौत हो गई थी। उसके पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप है कि कॉलेज की तीन लड़कियों ने उनकी बेटी की रैगिंग की और प्रोफेसर ने उसका यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) किया। पिता का कहना है कि उनकी बेटी को जातिवादी टिप्पणियों का भी सामना करना पड़ा।
प्रोफेसर ने आरोपों को बताया झूठ
शनिवार को धर्मशाला कोर्ट से अग्रिम जमानत मिलने के बाद प्रोफेसर अशोक कुमार मीडिया के सामने आए। उन्होंने खुद को बेकसूर बताया। प्रोफेसर ने कहा कि छात्रा पिछले सेमेस्टर में उनकी क्लास में थी, लेकिन इस सेमेस्टर में उनका उससे कोई वास्ता नहीं था। उन्होंने कहा, “साढ़े 26 साल के टीचिंग करियर में मुझ पर कभी ऐसे आरोप नहीं लगे। शायद यह मेरी किस्मत या कर्म था कि मुझे यह दाग सहना पड़ा।” उन्होंने कहा कि सस्पेंशन से निष्पक्ष जांच का रास्ता साफ होगा और सच सामने आएगा।
एक्शन मोड में सरकार और यूजीसी
Himachal Pradesh सरकार ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यों की एक विशेष कमेटी बनाई है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि कमेटी तीन दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट शिक्षा सचिव को सौंपेगी। दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस की जांच भी जारी है। इसके अलावा, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने भी पांच सदस्यों की एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी गठित की है। यह टीम यह पता लगाएगी कि कॉलेज प्रशासन से कहां चूक हुई और इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के लिए कौन जिम्मेदार है।
